भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद् में हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन

देहरादून। हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद् में 25 सितम्बर तक हिन्दी पखवाड़ा आयोजित किया गया। भा.वा.अ.शि.प. के सभागार में स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता के साथ समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डाॅ. सुरेश गैरोला, महानिदेशक, भा.वा.अ.षि.प., देहरादून मुख्य अतिथि थे।  कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए डाॅ. सुरेश गैरोला, महानिदेशक, भा.वा.अ.षि.प. ने कहा कि गत वर्ष के दौरान हिन्दी के उपयोग में आशातीत वृद्धि हुई है और अब आवश्यकता है कि हिन्दी के प्रयोग की गति को सरकार द्वारा नियत लक्ष्यों की प्राप्ति तक बरकरार रखा जाए। उन्होने जोर देते हुआ कहा कि राजभाषा का कार्यान्वयन हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। विपिन चैधरी उप महानिदेषक (विस्तार) ने स्वागत भाषण के दौरान राजभाषा हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए हिन्दी पखवाड़ा के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं का विवरण देते हुए बताया कि इस वर्ष हिन्दी पखवाड़ा के दौरान 7 प्रतियोगिताएं यथा, टिप्पण लेखन, निबंध, अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद, कम्प्यूटर पर हिन्दी टंकण, वाद-विवाद, राजभाषा हिन्दी प्रश्नोŸारी (क्विज) एवं स्वरचित हिन्दी काव्यपाठ आयोजित की गईं, जिनमें कुल 68 प्रतिभागियों ने अत्यंत उत्साह से भाग लिया। उन्होने सूचित किया कि भा.वा.अ.शि.प. राजभाषा पुरस्कारों केे अंतर्गत ’क’ क्षेत्र स्थित वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून को तथा ’ग’ क्षेत्र स्थित वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर को हिन्दी कार्यान्वयन में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2018-19 का राजभाषा पुरस्कार दिया जाता है। वर्ष 2018-19 के दौरान अपने शासकीय कार्यों में हिन्दी क्रियान्वयन में समग्र प्रदर्शन हेतु भा.वा.अ.शि.प. मुख्यालय के दस कार्मिकों को भा.वा.अ.शि.प. राजभाषा प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि डाॅ. सुरेश गैरोला, महानिदेषक, भा.वा.अ.शि.प. के करकमलों द्वारा पुरस्कार प्रदान किये गये। समारोह का समापन डाॅ. शामिला कालिया, सहायक महानिदेशक (मीडिया एवं विस्तार) द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। समापन समारोह में एस. डी. शर्मा, उप महानिदेषक (अनुसंधान) एवं कंचन देवी, उप महानिदेषक (शिक्षा) सहित लगभग 100 अधिकारी/वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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