उत्तराखंड: चीन सीमा पर ITBP सैनिकों के लिए मुश्किल हालात, बदहाल रास्तों की वजह से पहुंचने में हो रही दिक्कत

ITBP soldier

D.NEWS DEHRADUN पिथौरागढ़ जिले की चीन से 141 किमी लंबी सीमा लगी हुई है। इस सीमा की हिफाजत का जिम्मा आईटीबीपी की सातवीं और 14वीं वाहिनी पर है। सीमा क्षेत्र में 20 से अधिक गांव भी हैं। जिले का लिपु पास दोनों देशों की सीमा को आपस में बांटता है। चीन ने अपनी जमीन में भारतीय सीमा तक सड़क पहुंचा दी है। दूसरी ओर, भारतीय क्षेत्र में आज भी यहां के लोगों और आईटीबीपी जवानों को चीन सीमा से लगे लिपु पास तक पहुंचने के लिए 60 किमी से अधिक पैदल बदहाल रास्तों पर चलना पड़ता है।

ल्हासा में रेल पहुंचाने के बाद चीन अब तकलाकोट व्यापारिक मंडी को रेल मार्ग से जोड़ने की तैयारी में है। इसके विपरीत भारतीय सीमा में जवान संकरे पैदल और बर्फीले रास्तों पर ही पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। भारत-चीन सीमा से लगे गांवों में लोग विकास के अभाव में तेजी से पलायन कर रहे हैं। आपदा काल में यहां रह रहे लोगों के लिए जीवन दुश्वार हो जाता है। ऐसे में सीमा पर तेजी से खाली हो रहे गांव राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से चुनौती बन गए हैं।

सीमा सुरक्षा के लिए चुनौती है सड़क
सीमा की यह तस्वीर सुरक्षा प्रबंधों के लिए चुनौती है। आईटीबीपी की सातवीं वाहिनी के एक अधिकारी का कहना है कि दिसंबर से मई तक बर्फ जमा होने से सीमा की गश्त में सबसे कठिनाई आती है। सड़क से संपर्क नहीं होने से सुरक्षा बलों को चौकसी में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे बॉर्डर आउटपोस्ट तक साजो-सामान और रसद आदि पहुंचाने में अधिक वक्त लगता है। सब्जी और अन्य सामग्रियां ताजी नहीं रह पाती हैं। ढुलान में तीन दिन लगने के साथ ही अधिक रकम भी लगती है। पयर्टन, कारोबार और सुरक्षा की दृष्टि से यह रोड बेहद महत्वपूर्ण है।

भारी पड़ रहा है 15 किमी सड़क का दायरा

सामरिक महत्ता को देखते हुए मांगती-गुंजी-लिपुलेख सड़क बेहद महत्वपूर्ण है। तवाघाट-लिपुलेख सड़क का काम 1992 में शुरू हुआ। करीब 97 किमी की सड़क कटिंग बन गई है। लखनपुर से बूंदी तक 15 किमी का दायरा संवेदनशील बना हुआ है। इस हिस्से में लगातार हो रहे भूस्खलन और चट्टानों के खिसकने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारत-चीन सीमा पर 62.31 किमी लंबी मुनस्यारी-मिलम रोड, 42.30 किमी लंबी न्यू सोबला-तेजंग रोड और 32.70 किमी गुंजी-कुटी-जौलिंगकांग रोड पर भी काम चल रहा है। इन मार्गों में निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है।

सुरक्षा और यात्रा के लिए महत्वपूर्ण है यह सड़क
तवाघाट-लिपूलेख मोटर मार्ग सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भी इस रास्ते से होकर गुजरती है। लिपु पास से आगे चीन के हिस्से में कैलास मानसरोवर यात्री और व्यापारी, वाहन से जाते हैं।

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