उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा तय करने का अनोखा तरीका, सर्वेक्षण अटकने से नहीं लगा पिलर

Pillar missing from Indo Nepal border Nepal Sarakar constitutes inquiry team

देहरादून : उत्तराखंड के चम्पावत जिले के टनकपुर से लगी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित ब्रह्मदेव नाम के स्थान पर पिलर की जगह लकड़ी का एक खूंटा दोनों देशों की सीमा का निर्धारण करता है। असलियत में यह लकड़ी का खूंटा पिलर नंबर 810/2 है, जो पांच सालों से इसी तरह गड़ा हुआ है। बीते कई वर्षों से भारत-नेपाल सीमा का सर्वेक्षण अटका होने से विवाद की यह स्थिति पैदा हुई है। दोनों देशों की ओर से सीमा के सर्वे के बाद ही नोमैंस लैंड और गायब पिलरों का पता चल पाएगा। यूपी के लखीमपुर खीरी से उत्तराखंड के चम्पावत जिले के पास ब्रह्मदेव तक भारत-नेपाल के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर लंबे समय से विवाद चल आ रहा है। यहां प्रमुख विवाद ब्रह्मदेव स्थित नोमैंस लैंड को लेकर चल रहा है।

चम्पावत जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई पिलर गायब हो चुके हैं। इनमें एक विलुप्त पिलर संख्या 811/3ए भी है। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1984-85 से यह पिलर गायब होना बताया गया है। इसके अलावा ब्रह्मदेव के पास ही पिछले कई वर्षों से एक सब पिलर 810/2 भी गायब है। इस सब पिलरों के स्थान को प्रदर्शित करने के लिए मौके पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने लकड़ी का खूंटा गाड़ा है। अब सर्वे के बाद ही विलुप्त पिलर 811/3ए दोबारा स्थापित होगा उसके बाद ही कॉडिनेस्ट मिलान करने पर अन्य पिलरों की स्थिति भी साफ हो पाएगी। दोनों देशों की ओर से चौथे चरण में लखीमपुर खीरी से टनकपुर के ब्रह्मदेव तक सीमांकन की तैयारी शुरू कर ली गई है। 

विलुप्त पिलर, खूंटे वाले पिलर के ईदगिर्द के हालात
टनकपुर। विलुप्त हुए पिलर संख्या 811/3ए के आसपास नेपाली नागरिकों की ओर से खेती की जा रही है। वहीं नए पिलर संख्या 810/2 के करीब फिलहाल कोई अतिक्रमण नहीं है। इस लकड़ी के खूंटे वाले पिलर संख्या 810/2 के करीब 100 मीटर आगे नेपाली नागरिकों की आबादी है। यह पिलर एनएचपीसी बैराज के पार नेपाल की ओर ब्रह्मदेव में है।

222 सीमा स्तंभों का होना है निर्माण
पिछले साल लखीमपुर खीरी से टनकपुर तक सीमा सर्वे की तैयारियां शुरू हुई थीं। तय हुआ था कि यूपी से उत्तराखंड के टनकपुर तक भारत और नेपाल के बीच करीब 222 सीमा स्तंभों और उप स्तंभों का निर्माण अथवा जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसमें भारत की ओर सात मुख्य पिलर, 72 सब पिलर, 51 माइनर पिलर जबकि नेपाल की ओर से 8 मुख्य पिलर, 42-42 सब एवं माइनर पिलर के निर्माण और जीर्णोद्धार का कार्य शामिल था। चम्पावत जिले में इंडो-नेपाल सीमा पर कुल 16 पिलर हैं। 
 

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