कहाँ हुआ: डॉ. भीमवराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने पर बढ़ा विवाद, आगजनी व पथराव किया

मौके पर पुलिस फोर्स तैनात की गई थी, लेकिन इसके बाद भी ग्रामीणों ने पथराव कर दिया।

देहरादून, (देवभूमि जनसंवाद न्यूज़) राजस्थान के भरतपुर में महाराजा सूरजमल और डॉ. भीमवराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित पर विवाद बढ़ गया। बुधवार रात ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। आगजनी की। पुलिस मौके पर पहुंची तो उस पर भी पथराव शुरू कर दिया।

मामला भरतपुर जिले के नदबई इलाके का है। रात करीब 8 बजे शुरू हुआ बवाल देर रात 2 बजे तक चलता रहा। लोगों को हटाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। आज सुबह भी माहौल तनावपूर्ण है।

अंबेडकर और सूरजमल की प्रतिमा लगाने को लेकर विवाद हुआ
दरअसल, नगर पालिका नदबई इलाके में 3 जगह मूर्तियां लगा रही है। संभागीय आयुक्त सांवरमल वर्मा की अध्यक्षता में कमेटी ने तय किया कि, कुम्हेर चौराहे पर महाराजा सूरजमल, बैलारा चौराहे पर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और नगर चौराहे पर भगवान परशुराम की मूर्ति लगाई जाएगी। पर स्थानीय लोगों की मांग है कि नदबई का मुख्य चौराहा बैलारा है, ऐसे में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा बैलारा चौराहे पर लगनी चाहिए। इसी मांग को लेकर लोगों ने धरना भी दिया।

पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने बयान दिया था कि आप जो चाहते हैं, वही होगा आप धरना खत्म कीजिए। इस बीच मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बैलारा चौराहे पर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और डेहरा मोड चौराहे पर महाराजा सूरजमल की मूर्ति लगाई जाए। बस इसी को लेकर विरोध शुरू हो गया है।
मंत्री के बयान के बाद लोग नाराज, स‌ड़कों पर उतरे
मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद एक लेटर जारी किया गया। इसमें डेहरा मोड पर महाराजा सूरजमल और बैलारा चौराहे पर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने की बात कही गई। जैसे ही यह लेटर और मंत्री का बयान गांव के लोगों तक पहुंचा तो नदबई में इसका विरोध शुरू हो गया।

लोग मांग करने लगे कि बैलारा चौराहे पर महाराजा सूरजमल की मूर्ति लगनी चाहिए। इसके बाद आसपास के गांव के लोग बैलारा चौराहे की तरफ बढ़ने लगे। प्रशासन को आशंका थी कि कहीं मूर्ति लगाने वाले गुम्बद को न तोड़ दिया जाए, इसलिए बैलारा चौराहे पर पुलिस तैनात कर दी।
पेट्रोल डाल लगाई आग

मूर्ति लगाने को लेकर बुधवार देर रात तक विरोध इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों ने सड़क पर आग लगा कर रास्ता जाम कर दिया।

हालात को देखते हुए पूरे इलाके में पुलिस फोर्स तैनात की गई थी, लेकिन रात 8 बजे बाद से हालात बिगड़ने शुरू हो गए। विरोध कर रहे ग्रामीणों ने पहले जाम लगा दिया और पेट्रोल डाल सड़कों पर आगजनी शुरू कर दी। लोगों ने नदबई की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया। पुलिस और मीडिया को भी बैलारा चौराहे की तरफ जाने से रोक दिया गया।

नदबई से पहले बूढ़ावरी गांव, नगला खटोटि गांव की मुख्य सड़कों पर भी आगजनी की गई। यहां भी जाम लगाने का प्रयास किया गया। पुलिस जिन-जिन रास्तों पर गश्त कर रही थी, लोग वहां पथराव करने लगे।

रात 12 बजे बाद हालात बेकाबू हो गए। अंधेरे का फायदा उठा ग्रामीण पुलिस पर पथराव करते रहे। रात करीब 1 बजे एसपी श्याम सिंह भी बैलारा चौराहे पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
गांवों में नाम पूछकर एंट्री, मोबाइल तक नहीं निकालने दिया

नदबई से पहले रास्ता ब्लॉक कर ग्रामीण नाम और गांव का पता पूछकर लोगों को जाने दे रहे थे। जैसे ही आसपास के गांवों में पुलिस की गाड़ी दिखाई देती, लोग पथराव शुरू कर देते थे।

इस बीच रात के अंधेरे में कुछ लोग बैलारा चौराहे की तरफ भी बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। प्रदर्शनकारियों ने लोगों को मोबाइल तक नहीं निकालने दिया ताकि कोई हंगामे-बवाल का वीडियो नहीं बना सके।

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