कोरोना का कहर, 10वें अस्पताल में बेड मिला पर नहीं बची जान ,चौथे दिन मिला ICU पर नहीं बचीं मां की जान

देहरादून: कोरोना महामारी के चलते अस्पतालों में बेड मिलना मुश्किल हो गया है। प्रेमनगर के एक व्यक्ति ने अपनी कोरोना पीड़ति पत्नी को भर्ती कराने के लिए रातभर शहर के नौ अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन कहीं भी बेड़ नहीं मिला। सुबह कोरोनेशन अस्पताल में बेड मिला, लेकिन शाम होने से पहले पत्नी की मौत हो गई।  प्रेमनगर निवासी राजेंद्र शर्मा की पत्नी सुनीता शर्मा (42) को कुछ दिन से बुखार की शिकायत थी। टेस्ट कराया तो रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। एक दिन घर पर ही दवाइयां लीं। राजेंद्र शर्मा ने बताया कि मंगलवार रात को पत्नी की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत होने लगी। वह आनन-फानन में प्रेमनगर के सरकारी अस्पताल ले आए, लेकिन यहां बेड नहीं मिल पाया।

दून अस्पताल पहुंचे। यहां भी बेड खाली नहीं था। इसके बाद एक से दूसरे कुछ नौ सरकारी और निजी अस्पतालों में गए, लेकिन बेड नहीं मिला। सुबह कोरोनेशन अस्पताल गए। यहां इमरजेंसी में भर्ती करवाया। डॉक्टरों ने एक घंटे तक ऑक्सीजन दिया तो पत्नी की स्थिति में सुधार आ गया और वह खुद चलकर शौच भी गईं। इसके बाद यहां मरीज बढ़ गए। आरोप है कि दस-दस मिनट बारी-बारी से मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही थी। एक बजे पत्नी को वार्ड में भर्ती किया गया। शाम चार बजे बताया गया कि मौत हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी को ऑक्सीजन नहीं दी गई। राजेंद्र खुद सिटी बस संचालक हैं। उनका एक बेटा और बेटी है। 

हमारा अस्पताल में 30 कोविड बेड लगे हैं, लेकिन दो घंटे में ही सभी बेड फुल हो गए। इमरजेंसी में ऑक्सीजन के लिए मारामारी है। सभी को ऑक्सीजन देना जरूरी है। हमारे पास जितनी सुविधाएं हैं, उस हिसाब से काम कर रहे हैं, लेकिन स्थिति बड़ी खराब हो गई है। 
डॉ. मनोज उप्रेती, सीएमएस, कोरोनेशन अस्पताल

चौथे दिन मिला आईसीयू बेड पर मां नहीं बचीं
पिथौरागढ़ के मेन बाजार निवासी अमित पाटनी 23 अप्रैल को अपनी मां को जोड़ों के दर्द का इलाज कराने के लिए दून आए थे। यहां नंदा की चौकी में भाई के कमरे पर रुके। भाई दून में पढ़ाई करता है।  55 वर्षीय मां का कोरोना एंटीजन जांच कराई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई, लेकिन सांस की तकलीफ होने लगी। मां को अस्पताल पहुंचाने के लिए ऑटो बुक किया, शहर के एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे। इमरजेंसी से यह कहकर लौटा दिया गया कि बेड नहीं हैं। एक के बाद एक 15 अस्पतालों में गए, लेकिन बेड नहीं मिला। एक अस्पताल में कुर्सी पर ऑक्सीजन लगाने का इंतजाम हो पाया, लेकिन बेड नहीं मिला। शहर के अवधेश की मदद से मां को दून अस्पताल लेकर पहुंचे।

यहां किसी तरह पीआरओ संदीप राणा ने उन्हें इमरजेंसी में बेड दिलाया। अमित बताते हैं कि ऑक्सीजन लेवल 60 होने के चलते मां को आईसीयू की सख्त जरूरत थी। चार दिन तक इंतजार के बाद भी आईसीयू बेड नहीं मिला। मंगलवार देर रात आईसीयू मिला, लेकिन काफी देर हो चुकी थी। ऑक्सीजन लेवल 10 तक आ गया और मां ने दम तोड़ दिया। दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि अस्पताल में गंभीर मरीज ही ज्यादा आ रहे हैं। आईसीयू बेड खाली नहीं हैं, जो ज्यादा गंभीर होता है, उसे आईसीयू शिफ्ट किया जाता है।

13 घंटे बाद मिला शव
दून अस्पताल में मौत के बाद शव परिजनों को 13 घंटे बाद मिला। रात करीब 11 बजे बुजुर्ग की मौत हुई। उन्हें सुबह दस बजे शव लेने के लिए बुलाया गया। लेकिन उन्हें 11 बजे तक भी शव देने में आनाकानी की जाती रही। पता चला कि शव को आईसीयू से मोर्चरी में ही नहीं शिफ्ट किया गया। 11 बजे वहां गए तो तब भी स्टाफ ने डेढ़ घंटे लगा दिए। करीब एक बजे शव दिया गया। रायपुर में अंतिम संस्कार किया गया।
 

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