निरंजनी अखाड़ा श्रीपंचायती में बीता था बचपन, नरेंद्र गिरी ने हरिद्वार गंगातटों पर ही सिखी थी संतई

देहरादून: (देवभूमि जनसंवाद न्यूज़) पंचायती अखाड़े के वरिष्ठ संत और दूसरी बार अखाड़ा परिषद अध्यक्ष बनने वाले नरेंद्र गिरी का बचपन हरिद्वार में ही बीता था। हरिद्वार गंगातट पर ही उन्होंने संतई और नेतृत्व करने का गुण सीखा था। कई साल हरिद्वार पंचायती अखाड़े में बीताने के बाद वह प्रयागराज गए थे। जहां बाद में उन्हें बाघंबरी गद्दी का श्रीमहंत बनाया गया था।
प्रयागराज में नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत के बाद संत जगत में दुख की लहर दौड़ पड़ी है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष होने के साथ साथ नरेंद्र गिरी का हरिद्वार से पुराना नाता रहा है। पिछले चार सालों में लगातार नरेंद्र गिरी हरिद्वार आते रहे है। कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर प्रयागराज में कुंभ संपन्न होने के बाद वह हरिद्वार आते रहे है।अप्रैल में कुंभ समापन के बाद भी वह कई बार हरिद्वार आये थे। उनका बचपन हरिद्वार पंचायती अखाड़ा में ही बीता है। गंगातट में ही उन्होंने संतई के गुण सीखे थे। कई बार उन्होंने अपने साक्षात्कार में भी इस बात का जिक्र किया था कि उन्होंने पंचायती अखाड़े में अपना बचपन बिताया और सेवा की। अखाड़े में हनुमान की सेवा करने के बाद ही उन्हें बाघंबर गद्दी में बैठने का अवसर मिला था।नरेंद्र गिरी ने अखाड़ों को दिलवाए थे एक-एक करोड़
हरिद्वार। संदिग्ध परिस्थितियों में प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ में मृत मिले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने ही हरिद्वार में संपन्न हुए कुंभ में अखाड़ों को एक-एक करोड़ रुपये दिलाये थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री के इनकार करने के बाद उन्होंने विरोध किया था। जिसके बाद अखाड़ों को हरिद्वार कुंभ के लिए पहली बार एक-एक करोड़ रुपये दिए गए थे। हालांकि श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने 5 करोड़ रुपये की मांग की थी।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बनने के बाद नरेंद्र गिरी की हरिद्वार में सक्रियता बढ़ी थी। प्रयागराज में हुए कुंभ के बाद हरिद्वार कुंभ में अखाड़ों के लिए नरेंद्र गिरी ने ही रुपये मांगे थे। ताकि कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अखाड़ों में व्यवस्था की जा सके। सभी अखाड़ों को साथ लेकर चलने का दावा करने वाले श्रीमहंत नरेंद्र गिरी की बात मानने से सरकार ने इनकार कर दिया था। लेकिन जब नरेंद्र गिरी ने अपने तेवर दिखाये तो सरकार को अखाड़ों को एक-एक करोड़ रुपये देने की घोषणा करनी पड़ी।
हरिद्वार में दोबारा बनाये थे अध्यक्ष
नरेंद्र गिरी 10 अक्तूबर 2019 को हरिद्वार में दोबारा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बने थे। कनखल के बड़ा उदासीन अखाड़ा में परिषद के सभी सदस्यों की बैठक हुई थी। जनवरी 2020 में खत्म होने वाले कार्यकाल से पहले ही बैठक में अखाड़ा परिषद का चुनाव किया गया था। सर्वसम्मति से महंत नरेंद्र गिरि को दोबारा अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया था और महंत हरि गिरि परिषद के महामंत्री चुने गए थे। दोनों ही पदाधिकारियों को दोबारा चुना गया था।

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