नैनी झील के संरक्षण के लिए एनजीटी ने पूछा, क्या किया? दो माह के अन्दर मांगी रिपोर्ट

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फाइल फोटो

D.J.S News Dehradun : नैनी झील के लगातार गिर रहे जलस्तर को रोकने और इसके रिचार्जिंग क्षेत्रों को संरक्षित रखने को लेकर अब तक किए गए कार्यों और नगर की धारण क्षमता पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने तथ्यात्मक और एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। सचिव शहरी विकास, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीएम नैनीताल को दो महीने के अंदर संयुक्त रूप से यह रिपोर्ट देनी होगी। एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और विशेषज्ञ सदस्य नागिन नंदा की बेंच ने शुक्रवार को गैर सरकारी संस्था फ्रेंड्स की याचिका पर यह रिपोर्ट मांगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। उधर, डीएम विनोद सुमन ने कहा कि इस संबंध में निर्देश के अनुरूप त्वरित कार्यवाही की जाएगी। विज्ञापन

संस्था की ओर से याचिका दायर करने वाले सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने याचिका में कहा था कि नैनी झील के संरक्षण को लेकर पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद नैनी झील को रिचार्ज करने वाले सूखाताल क्षेत्र में अवैध निर्माण और कब्जे जारी रहे और निर्माण कार्यों का मलबा झील को जाने वाले नालों में डाला जाता रहा, जिससे झील का जलस्तर लगातार गिरता रहा। यहां तक कि बीते वर्षों में झील का जलस्तर शून्य से भी कई फीट नीचे चला गया।

इन पर तत्कालीन प्रशासन और झील विकास प्राधिकरण ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ ही वर्षों में नैनीताल की धारण क्षमता के विपरीत पर्यटन में बेतहाशा वृद्धि हुई है। भारी तादाद में पर्यटकों के आने से नगर में प्रदूषण बढ़ा, अनियंत्रित निर्माण हुए और झील का अत्यधिक दोहन हुआ, जिससे नगर के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया। 

पिछले निर्देर्शों का नहीं हुआ असर
एनजीटी की ओर से पिछले साल अक्तूबर में हिल स्टेशनों की धारण क्षमता के आकलन की आवश्यकता संबंधी निर्देश दिए गए थे लेकिन इन निर्देशों का भी कोई असर नहीं दिखा। याचिका में कहा गया था कि प्राकृतिक जलस्रोतों के आसपास निर्माण कार्यों से अधिकतर स्रोत सूख गए या इनका प्रवाह घट गया। अधिवक्ता आकाश ने बताया कि इन समस्याओं से संस्था ने पूर्व में पर्यावरण मंत्रालय को भी अवगत कराया था, जिस पर मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन वह रिपोर्ट भी नहीं दी गई।

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