पांच हजार में बिक रहे हाईस्कूल-इंटर के जाली प्रमाणपत्र

हाईस्कूल-इंटर करने में असफल और प्रमाणपत्र में उम्र कम कराने की चाह में शिक्षण संस्थानों के फर्जी सर्टिफिकेट और डिग्रियां तैयार करने का गोरखधंधा जमकर फल-फूल रहा है। हल्द्वानी और रुद्रपुर के बिलासपुर में अवैध तरीके से हाथों-हाथ फर्जी प्रमाणपत्र और डिग्रियां तैयार करने में चार से पांच गिरोह सक्रिय हैं। उक्त गिरोह जरूरत के अनुसार हर तरीके के डिप्लोमा, डिग्री, हाईस्कूल और इंटर के प्रमाणपत्र बेचकर युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। युवा भी समय की बचत और पढ़ाई के झंझट से बचने के लिये इन प्रमाणपत्रों को खरीद रहे हैं।

प्राइवेट नौकरी में नहीं होती जांच
प्राइवेट संस्थानों और सिडकुल की अधिकांश फैक्ट्रियों में अस्थायी कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच नहीं होती है। यहां ठेकेदार के अधीन और अस्थायी तौर पर रखे जाने वाले कर्मचारियों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का वेरिफिकेशन नहीं कराया जाता है। इसके चलते किन्हीं कारणों से पढ़ाई नहीं कर सके युवा जाली प्रमाणपत्र तैयार कर नौकरी पा लेते हैं। उक्त युवा ज्यादा समय भी कंपनी में नौकरी नहीं करते हैं, इसीलिये वह फर्जी प्रमाणपत्र लगा देते हैं।

ग्राहक लाने पर देते हैं कमीशन
फर्जी डिग्री तैयार करने वाला गिरोह ग्राहक लाने पर कमीशन भी देता है। प्रमाणपत्र के हिसाब से 20 से 25 प्रतिशत कमीशन तय किया गया है। डिग्री, डिप्लोमा और हाईस्कूल और इंटर के प्रमाणपत्र तैयार कराने के लिए पूरा पैसा पहले देना होता है।

इनसे तैयार कर रहे जाली सर्टिफिकेट
फर्जी डिग्री, डिग्री छापने के खाली कागज, कम्प्यूटर, हार्ड डिस्क, प्रिंटिंग की दो बड़ी मशीनें, स्कैनर, थ्री डी लोगो, मुहर आदि।

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