प्रकृति विज्ञान को भी समझने की जरूरत : उनियाल

देहरादून : अल्मोड़ा। बाल प्रहरी और बाल साहित्य संस्थान की ओर से आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून (यू कास्ट) के वैज्ञानिक, संयुक्त निदेशक डॉ. डीपी उनियाल ने कहा कि जल, जंगल जमीन और मानव के रिश्ते को समझते हुए प्रकृति विज्ञान को भी समझने की जरूरत है। हमारे पारंपरिक समाज में आदिकाल से मानव विज्ञान का प्रयोग अपने दैनिक जीवन में कर रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिक परिषद लोक विज्ञान से गांव वालों को जोड़ने का भी प्रयास कर रहा है। जीवन में विज्ञान का महत्वपूर्ण स्थान है। कूड़ा जहां हमारे लिए एक समस्या बना है वहीं कूड़े के बहाने कई लोगों को रोजगार मिल रहा है।
शिव नारायण: रिसाइकिलिंग से कूड़े का उपयोग किया जा रहा है।
उत्तराखंड शिक्षा विभाग के उपनिदेशक आकाश सारस्वत ने आयोजक मंडल की ओर से सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमेशा मानव के उपकार की सोचती है लेकिन हम प्रकृति का अवैज्ञानिक दोहन कर रहे हैं। अहमदाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार और बाल प्रहरी के संरक्षक श्याम पलट पांडेय ने बच्चों की प्रस्तुति की सराहना की।
इस मौके पर चित्रांषी, प्रांजलि, मीतू, आयुष, रुचिर, शिवांशी अनन्या, स्नेही, सुवर्णा, वीरवर्धन, गार्गी, सुदिति, श्रीमन, सृजन, प्रांशु, रक्षिता, शीतल, एकाग्रता आदि बच्चों ने विचार रखे। अक्षत गौड़ (रुद्रप्रयाग), जयवर्धन सिराड़ी (अल्मोड़ा), जिज्ञासा जोशी (सोमेश्वर), देवरक्षिता नेगी (चौखुटिया), अक्षता (गंगोलीहाट) ने अध्यक्षीय भाषण के साथ प्रस्तुति दी। संचालन कुर्मांचल एकेडमी अल्मोड़ा की कक्षा 11 की छात्रा अक्षरा भट्ट ने किया।

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