श्मशान घाटों में भी चल रही है वेटिंग, कोरोना मृतकों के दाह संस्कार को भी मनमानी

देहरादून: कोरोना आपदा के इस भयावह काल में जब हर कोई अपनी जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लगा है। उस समय भी कुछ लोग ऐसे हैं जो लोगों की मदद करने के बजायग उनकी जेबें काटने में लगे हुए हैं। भेल मुख्य चिकित्सालय का तो यह हाल है कि यहां से कोविड शवों को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए 4 से 5 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं और यह सब आला अधिकारियों की नाक के नीचे खुलेआम हो रहा है। भेल मुख्य चिकित्सालय से निजी एम्बुलेंस चलाने वाली कंपनी का टेंडर 31 मार्च को समाप्त हो चुका है। कंपनी की शिकायतों के चलते इसे रिन्यू नहीं किया गया। बावजूद इसके अस्पताल परिसर से इसकी एम्बुलेंस का संचालन लगातार जारी है।

बड़ी बात यह कि संचालक इन दिनों कोविड शव के नाम पर पहले से परेशान मरीजों के परिजनों से मनमाना पैसा वसूलने में लगे हुए हैं जिसे रोकने वाला भेल में कोई नहीं है। न तो अस्पताल प्रबंधन और न ही सम्पदा विभाग। भेल अस्पताल द्वारा भेल कर्मियों की मौत पर भेल कैंपस के अंदर तक छोड़ने की व्यवस्था है लेकिन कोविड शवों को सीधे श्मशान जाना होता है जिसका फायदा कुछ लोगों की शह पर एम्बुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी उठा रही है। इतना ही नहीं सामान्य मरीज का शव ले जाने के लिए भी ज्वालापुर तक के 1 हजार से 12 सौ रुपये वसूले जा रहे हैं। पूर्व में अस्पताल प्रबंधन ने एम्बुलेंस का किराया किलोमीटर के हिसाब से तय कर दिया था लेकिन अब उसका टेंडर खत्म होने के कारण संचालक मनमानी पर उतर आया है। 

इनसे सीखें:आरके मिशन बंगाली आपताल में एम्बुलेंस सेवा देने वाले अमरजीत सिंह बहुत ही कम कीमत पर सेवाएं दे रहे हैं। जहां देहरादून मैक्स अस्पताल तक कोविड मरीज को ले जाने के लिए और एम्बुलेंस 7 से 9 हजार ले रही है वहीं यह महज 3 हजार रुपये लेकर रोगी को लेकर जा रहे हैं। इतना ही नही गरीब या लावारिस के शव को न केवल श्मशान तक निशुल्क ले जाते हैं बल्कि उनका अंतिम संस्कार तक का खर्च वहन करने में लगे हैं ।

अस्पताल से श्मशान तक संघर्ष ही संघर्ष
अचानक कोरोना रोगियों की बढ़ती संख्या के सामने अस्पताल के बेड बहुत कम पड़ गए है। व्यवस्था जुटाना प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है।  हरिद्वार में हालत ये हैं कि सभी अस्पतालों में बेड कोरोना संक्रमितों से भरे हुए हैं। लोग घरों में दम तोड़ने को मजबूर हो गए हैं। हालत यह हो गई है कि कोरोना संक्रमितों के शवों को कांधा देने के लिए भी लोग नहीं मिल रहे हैं। श्मशान में भी बेटियां अपनों को मुख्गानि देती दिख रही हैं। शवों के आगे श्मशान छोटे पड़ने लगे हैं।मरने वालों में सबसे अधिक संख्या ऐसे लोगों की है जो अस्पतालों में बेड न मिलने पर घर में ही दम तोड़ रहे हैं।

रोगियों के साथ ही संशाधनों के अभाव में प्रशासन की बेबसी और जनप्रतिनिधियों के दावे भी दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। जिस शहर में कुंभ, अर्द्धकुंभ, कावड़ मेला, बड़े स्नान पर्वों का आयोजन साल भर चला रहता हो। उस शहर की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हालत में है। वेंटीलेंटर है तो चलाने को स्टाफ नहीं। न संसाधन है न ही दक्ष स्टाफ। रानीपुर मोड़ पर कोरोना संक्रमित एक परिवार में पति पत्नी व बेटी को कोरोना हुआ। हालत बिगड़ने पर बड़ी मुश्किल से बेटी ने मां को शहर के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराया और पिता व खुद का घर पर ही ख्याल रखा। बेटी को रात ड़ेढ़ बजे मां के देहांत की सूचना अस्पताल से मिली।

सुबह जब बेटी अस्पताल पहुंची तो पांच किलोमीटर की दूरी तक शव को श्मशान पहुंचाने के लिए एंबूलेंस वाले ने 4 हजार रुपये लिए। शव को कांधा देकर बेटी को चार लोग जब नहीं मिले तो उसने भाजपा नेत्री अन्नू कक्कड़ को फोन करके सहयोग मांगा।  अन्नू कक्कड़ खुद श्मशान घाट  गई और उन्होंने संस्कार के लिए भूपेंद्र और प्रशांत सैनी को मदद के लिए बुलाया। तब कहीं जाकर बेटी मां को मुखाग्नि दे सकी। मृतका का एक बेटा हैदराबाद में नौकरी कर रहा है। पिछले 15 दिन से अपने मां और पिताजी को बचाने के लिए ये बेटी बरखा संघर्ष करती आ रही है।  

भेल अस्पताल के अंदर की जिम्मेदारी हमारी है बाहर की जिम्मेदारी सम्पदा विभाग और भेल एचआर विभाग की है। कंपनी का टेंडर खत्म हो चुका है और इसकी जानकारी सम्पदा विभाग को भी दी जा चुकी है। इस समय हम पर अस्पताल का काफी भार है। लोगों से नाजायज पैदा लेने वाली कंपनी को एचआर व सम्पदाय विभाग द्वारा तत्काल हटाया जाना चहिए।
डॉ सुरजीत दास, सीएमओ, भेल

भेल अस्पताल के बाहर खड़ी होने वाली निजी एम्बुलेंस अस्पताल प्रबंधन ने खड़ी कराई हुई हैं। यदि वहां से एम्बुलेंस नहीं हटती तो उन्हें पुलिस को सूचित करना चाहिए लेकिन वे ऐसा न तो कर रहे हैं और न ही करना चाहते हैं। एम्बुलेंस अस्पताल के अंदर से शवों और मरीजों को दिन रात ले जा रही है लेकिन अस्पताल प्रबंधन कुछ नहीं करता। 
नवीन लुनियाल, प्रमुख, सम्पदा विभाग

यह पता चला है कि आपताल के बाहर खड़ी होने वाली एम्बुलेंस मनमाना पैसा वसूल रही है। इस कंपनी का टेंडर समाप्त हो चुका है। अब इसे वहां खड़े होने का कोई अधिकार नहीं है भेल अस्पताल प्रबंधन या सम्पदा विभाग इन्हें क्यों नहीं हटवा रहा है इसकी जानकारी नहीं है।
राकेश मणिकताला, जनसंपर्क अधिकारी, भेल

हरिद्वार में लगी शवों की कतार श्मशान घाट पड़ रहे छोटे  
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच हरिद्वार में शवों की कतार लग गई है। खड़खड़ी श्मशान घाट भी छोटा पड़ता नजर आ रहा है। शुक्रवार को खड़खड़ी श्मशान घाट में रिकार्ड 65 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। जो आज तक कभी नहीं हुआ था। इसमें 22 कोरोना संक्रमण से मरने वाले थे और 43 लोग सामान्य बीमारी से थे।  शुक्रवार को खड़खड़ी श्मशान घाट का संचालन करने वाले संस्था सेवा समिति ने नगर निगम को पत्र भेजकर श्मशान घाट के विस्तारीकरण की मांग की है। उपाध्यक्ष जगत सिंह रावत ने पत्र में कहा है कि पिछले दिनों से हरिद्वार में अधिक शव आ रहे है। जिस कारण लोगों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ा रहा है। श्मशान घाट छोटा पड़ रहा है। पास की खाली पड़ी जमीन को भी श्मशान घाट को दिया जाए। जिससे अधिक व्यवस्था हो सकें। बताया कि बीते गुरुवार को 56 शवों का संस्कार हुआ था। शुक्रवार का संख्या 65 पहुंच गई । 

चंडी घाट पर हो संस्कार : उपाध्यक्ष जगत सिंह रावत ने चंडी घाट श्मशान घाट में कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों का संस्कार करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि शहर से अलग चंडी घाट श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इससे खड़खड़ी के श्मशान घाट पर कम भीड़ होगी। 

कनखल में हुए 51 अंतिम संस्कार 
कनखल श्मशान घाट में 51 लोगों के अंतिम संस्कार किए गए। जिसमें 12 कोरोना से संक्रमित थे। 15 से अधिक शवों के संस्कार श्मशान घाट के सामने किये गए। शवों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
 

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