मुंबई: आरे कॉलोनी आंदोलन के दौरान पर्यावरणविदों पर दर्ज केस होंगे वापस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कमान संभालते के बाद दूसरा बड़ा ऐलान किया है। सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा है कि आरे कॉलोनी आंदोलन के दौरान पर्यावरणविदों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे। सीएम ने कहा कि मैंने पर्यावरणविदों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है। इससे पहले 29 नवंबर को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कार्यभार संभालने के बाद आरे कॉलोनी में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बन रहे कार शेड का काम रोकने के आदेश दिए थे। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था कि मेट्रो का काम जारी रहेगा, लेकिन अब एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। सीएम ठाकरे ने कहा था, “मैंने आरे मेट्रो कार शेड परियोजना के काम को रोकने का आदेश दिया है। मेट्रो का काम नहीं रुकेगा लेकिन अगले फैसले तक आरे का एक भी पत्ता नहीं काटा जाएगा। गौरतलब है कि मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों के काटे जाने का स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने अक्टूबर के महीने में जोरदार विरोध किया था। लोग मौके पर धरने पर बैठ गए थे। प्रदर्शन कर रहे करीब 29 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। अक्टूबर के महीने में ही मुंबई की एक अदालत से सभी को जमानत मिल गई थी। प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी करने और सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। डिंडोशी हॉलिडे कोर्ट ने 7 हजार रुपये के नकद बॉन्ड पर सशर्त जमानत दे दी थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी। आरे में 2600 से ज्यादा पेड़ों को काट कर मेट्रो कार शेड बनाए जाने की तैयार थी, जिसके खिलाफ लोग ने विरोध-प्रदर्शन किया था। उस समय एमएमआरसीएल ने कहा था कि उनके पास पेड़ काटने की अनुमति थी। वहीं प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि एमएमआरसीएल पेड़ों तभी काट सकता है, जब परमिशन को म्युनिसिपल कारपोरेशन के वेबसाइट पर अपलोड होने के 15 दिन बीत चुके हों।

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