स्थानीय मेंथा उत्पादकों को सल्फर उपयोग कर बहुत कम समय में लाभ होना हो रहा अनुभव

सम्भल:मिंटा फैमिली का पौधा मेंथा लोकप्रिय कृषि उपज है, लेकिन स्थानीय किसान कई वर्षों से अपेक्षित उत्पादन और उच्च गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। वे अधिक उत्पादकता के मुख्य कारण का पता लगाने में सक्षम नहीं थे। पिछले वर्ष सम्भल के शिक्षित किसान नरेंद्र सिंह ने उन्हें मेंथा और गन्ना दोनों से अधिक उपज, गुणवत्ता का उत्पादन और लाभ प्राप्त करने का तरीका बताया।उसने अपनी मेंथा की फसल में 90%सल्फर वाला महाधन बैंसल्फ़ सुपरफास्ट उपयोग कियाऔर अधिक उपज हुई। 

सिंह ने कृषि क्षेत्र में हो रहे विकास पर अधिक ध्यान दिया और पौधों की वृद्धि और विकासमें सल्फर की भूमिका के बारे में जाना। उसे विशेषज्ञों से जानकारी मिली थी कि सल्फर से पत्तियों में क्लोरोफिल बनने में मदद मिलती है और पौधों में अधिक एंजाइम बनते हैं।इस क्षेत्र में गन्ना और मेंथा फसलों का अधिक उत्पादन होता है, यहाँ के किसानों को सल्फर एक वरदान के रूप में मिला है। “मैंने मेंथा की फसल में महाधन बैंसल्फ़ सुपरफास्ट उपयोग किया, जिसके कारण पौधे में अधिक पत्तियाँ और शाखाएँ विकसित हुईं थी और पौधे की ऊंचाई भी बढ़ गई थी। शाखाएँ मोटी हुईं थीं और पत्तियाँ हरी और चौड़ी हुई थीं। इसे उपयोग करने से मैंने अन्य वर्ष की तुलना में प्रति एकड़ 6 लीटर अधिक तेल का उत्पादन किया।ग्रेड ए गुणवत्ता का तेल प्राप्त हुआ था, जिसके कारण बाजार मूल्य अधिक मिला था।नरेंद्र सिंह ने कहा, मुझे प्रति एकड़ लगभग 8,400 रुपये का अतिरिक्त शुद्ध लाभ हुआ। इसी तरह से अन्य किसानों ने भी अपने मेंथा फसलों में सल्फर उपयोग किया। गन्ने और मेंथा की फसल में उत्पादन और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने में सल्फर की महत्वपूर्ण भूमिका है। सल्फर से गन्ने में रस की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ती है। इससे गन्ने का वजन बढ़ता है और 15% तक अधिक गन्ने का रस प्राप्त होता है।सल्फर से गन्ने में अधिक मात्रा में सुक्रोज का उत्पादन अधिक होता है, यह गन्ने की कटाई के बाद खेतों से चीनी के मिल तक पहुंचने की अवधि में गन्ने के वजन में कमी होना रोकता है।मेंथा में सल्फर उपयोग करने से तेल और गुणवत्ता में वृद्धि होती है। सल्फर उपयोग करने से मेंथा की शाखाएँ अधिक उगती हैं। सल्फर के कारण तने और पत्तियों में शुष्क पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, जिससे तेल का अधिक उत्पादन होता है। खाद डालने के 4 से 5 दिनों के बाद पौधों में सल्फर सल्फेट मिलना शुरू हो जाता है और यह 75 और कई अधिक दिनों तक मिलता रहता है। स्थानीय किसानों ने जानकारी दी कि बुवाई के समय 15 किलोग्राम प्रति एकड़ में महाधन बैंसल्फ़ सुपरफास्ट डालने पर मेंथा की फसल के लिए बहुत लाभकारी है।

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