आग बुझाने को उत्तराखंड में कर्मचारी नहीं, कितने स्टाफ की है कमी

त्रिकुटा पहाड़ी के जंगलों में लगी आग व भारत में वनाग्नि – Geography and You
प्रतीकात्मक चित्र

देहरादून : पीसीसीएफ राजीव भरतरी ने आखिरकार मान लिया कि जंगलों की आग बुझाने के लिए वन विभाग के पास कर्मचारी नहीं हैं। मानवजनित आग की घटनाओं को रोकना नामुमकिन हो गया है। फिर भी, सीमित कर्मचारियों और एनडीआरएफ के साथ वन विभाग आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटा है। इसके अलावा, अगले साल वनाग्नि बेकाबू होने से बचाने के लिए भी वन प्रभागों से प्रस्ताव मांग लिए गए हैं। इस साल नए उपकरणों के लिए 1.19 करोड़ रुपये मिले हैं और इनकी खरीदारी के लिए भी प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं। पीसीसीएफ राजीव भरतरी मंगलवार भवाली स्थित वन विश्राम गृह पहुंचे थे। यहां प्रेसवार्ता में उन्होंने वन कर्मचारियों के साथ एनडीआरएफ की ओर से वनाग्नि को काबू करने के प्रयासों की सराहना की। इस बार पूरे उत्तराखंड में बेकाबू हो चुकी जंगलों की आग पर पीसीसीएफ ने कहा कि, आग प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानव जनित है। लोगों की जागरूकता के बिना इसे काबू नहीं किया जा सकता।

जंगल की आग से बचाव के लिए उपकरण खरीदने को 1.6 करोड़ रुपये दिए गए हैं। जहां भी डीएफओ के पास वाहन नहीं हैं, वहां किराये पर वाहन लेने के आदेश भी दे दिए गए हैं।राजीव भरतरी, पीसीसीएफ-उत्तराखंड

भरतरी बोले-अल्मोड़ा जिले में  फॉरेस्ट गार्ड के 102 पद खाली: अल्मोड़ा में फॉरेस्ट गार्ड के 130 पदों में 102 पद खाली हैं। सिर्फ 27 गार्डों से जंगल की आग बुझाई जा रही है। यही हाल दूसरे डिविजनों का भी है, इसलिए कर्मचारियों के बिना आग पर काबू नहीं पाया जा सकता। कर्मचारियों की कमी जल्द दूर करेंगे।ब्लोअर से भी बुझाई जा रही है आग: भरतरी ने बताया कि यह पहला फायर सीजन है, जहां पत्तियों और आग का फैलाव घटाने को ब्लोवर इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य ने सभी डीएम को आपदा राहत कोष से पांच करोड़ दिए हैं। प्रेसवार्ता के दौरान मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजस्विनी पाटिल, डीएफओ टीआर बीजूलाल और रेंजर मुकुल शर्मा भी मौजूद रहे।

छह माह में पद भरने के निर्देश दे चुका है कोर्टदेहरादून। उत्तराखंड में जंगलों की आग को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार से वन विभाग में खाली पड़े पदों को छह माह के भीतर भरने को कहा है। अदालत ने सरकार से यह भी पूछा है कि, क्या भौगोलिक परिस्थितियों में कृत्रिम बारिश कराना संभव है। कोर्ट ने जंगलों की आग बुझाने के लिए स्थायी व्यवस्था करने को भी कहा है। हाईकोर्ट ने ग्राम स्तर पर कमेटियों के गठन का आदेश भी सरकार को दिया था।

उत्तराखंड में तेरह दिनों में 1700 हेक्टेयर जंगल जलेदेहरादून। राज्य में जंगलों की आग लगातार जारी है। मंगलवार को भी 68 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल 12 घंटे में जल गए। 74 घटनाएं दर्ज की गईं। अप्रैल में अब तक 17 सौ हेक्टेयर के आसपास जंगल जल चुके हैं। मंगलवार को मौसम शुष्क होने के कारण आग की घटनाओं में कमी नहीं आई। सीसीएफ-वनाग्नि मान सिंह ने बताया कि लगातार तेज धूप के चलते पेड़ सूख रहे हैं। सूखे पत्ते झड़ रहे हैं, जिससे जंगलों में आग भड़क रही है। वन विभाग के कर्मचारी मुस्तैदी से आग बुझाने में जुटे हैं।

फॉरेस्ट गार्ड के 2343 रेंजर के 80 पद खालीदेहरादून। राज्य के वन महकमे में कर्मचारियों और अधिकारियों की भारी कमी है। हालांकि कुछ संवर्गों में भर्ती की प्रक्रिया चालू है। मगर, अधिकारी संवर्ग में कोई विवाद न हो  तो तीन से चार साल में पद भर सकेंगे। हालांकि, फॉरेस्ट गार्ड के 1,218 पदों को दो माह में भरा जा सकता है। क्योंकि इसकी लिखित परीक्षा भी हो चुकी है। शारीरिक परीक्षा होनी है। ट्रेनिंग ज्वाइनिंग के बाद नौकरी के साथ भी करने का प्रावधान है। राज्यभर में फॉरेस्ट गार्ड के 3639 पद हैं। इनमें से 1,296 ही भरे हैं। 1218 पर भर्ती चल रही है। रेंजर के सीधी भर्ती के 154 में 105 और प्रमोशन के 154 में 31 पद खाली हैं। यानी कुल 80 पद खाली हैं। इनमें से सीधी भर्ती अगर अभी शुरू हुई और सब ठीक रहा तो 2024 में यह रेंजर वन विभाग को मिल भी सकते हैं। एसीएफ के सीधी भर्ती के 45 में से 45 खाली हैं और प्रमोशन के 45 में से 30 खाली हैं। सीधी भर्ती की लिखित परीक्षा हो गई है। लेकिन, रिजल्ट, दो साल ट्रेनिंग-प्रोबेशन समेत बाकी प्रक्रिया के बाद 2025 शुरू तकयह वन विभाग को मिल सकेंगे।

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