महिलाओ को उनके विरुद्ध होने वाले अत्याचारो के विरुद्ध जागरूक किया

D.J.S Dehradun: रामनगर । महिलाओ को उनके विरुद्ध होने वाले अत्याचारो के विरुद्ध जागरूक करने के लिये उन्हें महिला अधिकारों से जुड़े कानूनों की जानकारी से अवगत कराना जरूरी है। उक्त विचार बाल विकास परियोजना विभाग के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर ब्लॉक सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य महिला आयोग की पूर्व उपाध्यक्ष अमिता लोहानी ने व्यक्त किये। श्रीमती लोहनी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समूचे विश्व की महिलाओं के प्रति सम्मान व प्रंशसा के रूप में मनाया जाता है। बाल विकास परियोजना की सीडीपीओ राधा चुफाल ने अपने सम्बोधन में बताया कि इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। उनके अनुसार शिक्षित महिलाएं भी कानूनी दांवपेंच से अनजान होने की वजह से जाने-अनजाने में हिंसा सहती रहती हैं इसलिये महिलाओं को कानूनी रूप से शिक्षित करने के लिए मुहिम शुरू करना वक्त की जरूरत बन गया है।सुपरवाइज़ मीरा बोरा ने बताया कि किसी भी अपराध में गिरफ्त महिला को सूर्योदय से पहले और सूर्यास्‍त के बाद नहीं गिरफ्तार किया जा सकता, हालांकि इस संबंध में मजिस्‍ट्रेट के निर्देशानुसार कार्रवाई हो सकती है। श्रीमती बोरा ने समान वेतन का अधिकार बिल के जरिए सभी लिंग के लोगों को समान वेतन के अधिकार दिए जाने के लिये भारत सरकार की ओर से सभी कार्यों के लिए न्‍यूनतम मजदूरी तय किये जाने की जानकारी देते हुये बताया कि यदि महिलाओ की उनके कार्यालय में लैंगिक आधार पर वेतन में असमानता हो तो श्रम आयुक्‍त या महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से सीधे शिकायत कर सकती हैं। उनके अनुसार दहेज निषेध कानून के तहत देश में दहेज लेना और देना, दोनों को अपराध बनाया गया। विवाह के समय वर-वधू पक्ष की ओर ऐसे किसी भी ऐसे लेन-देन पर जेल की सजा हो सकती है। महिलाओं को स्‍पष्‍ट अधिकार हैं कि वे पुलिस के पास जाकर दहेज मांगे जाने की शिकायत दर्ज करा सकती हैं। लड़की-लड़का होना ईष्वरीय विधान है, माँ – पिता के हाथ का जादू नही, माँ – पिता या परिवार या समाज का जादू तो यह है कि वह अपने परिवरिश के ढंग से उसे या तो लाचार ग्रहणी बना देते हैं या आगे बढकर आत्मसम्मान का जीवन जीने की कला सीखा देते है। इसके आलावा राज्य सरकार द्वारा किशोरी शक्ति सवशक्ति परियोजना , नंदा देवी कन्या धन योजना व गौरीदेवी कन्या धन योजना जैसी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही। इस मौके पर मनमोहन सिंह रावत, नारायण दत्त, दीपा डोर्बी, राधा चुफाल, मीरा बोरा, पूनम गोस्वामी, सुनीता साह, द्रोपदी धपोला, गीता आर्या, गीता तिवाड़ी, माधवी मठपाल, धनेशवरी साह, भागीरथी, अनिता खोल्वे, शान्ति कबड़वाल, दुर्गा बिष्ट, पूनम गोला, सुनीता पोखरियाल, आभा, गीता देवी आदि मौजूद रही ।

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