राज्य की रेडड् प्लस कार्य योजना को तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के वन विभाग की क्षमता निर्माण हेतु हितधारको के परामर्श और विशेषज्ञयों की कार्यशालाओं का आयोजन

देहरादून : विकासशील देशों में वनों की कटाई और वन क्षरण से कार्बन उत्सर्जन को कम करना और वन कार्बन स्टॉक के संरक्षण की भूमिका, जंगलों का स्थायी प्रबंधन और वन कार्बन स्टॉक की वृद्धि को सामूहिक रूप से रेडड् प्लस के रूप में जाना जाता है। रेडड् प्लस का उदेंश्य विकासशील देशों में वनों की कटाई और वन क्षरण को कम करने, वन संरक्षण को बढ़ावा देने, वनों के सतत् प्रबंधन और वन कार्बन स्टॉक को बढ़ाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करना है। जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते ने जलवायु परिवर्तन शमन के लिए विकासशील देशों में रेडड् प्लस गतिविधियों को बढ़ावा देने का समर्थन किया है।
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्, देहरादून, पारितंत्र सेवाएं सुधार परियोजना के तहत राज्य रेडड् प्लस कार्य योजना तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ के वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य वन विभाग की क्षमता के निर्माण के लिए रायपुर (छत्तीसगढ़) में 17-20 फरवरी 2021 से चार दिवसीय हितधारको और विशेषज्ञ परामर्श कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है।
हितधारक परामर्श कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन वैश्विक समस्याओं में से एक है और जलवायु परिवर्तन के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। राज्य रेडड् प्लस एक्शन प्लान तैयार करने के लिए राज्य वन विभाग की क्षमता निर्माण रेडड् प्लस गतिविधियों के कार्यान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् के महानिदेशक श्री अरूण सिंह रावत ने कहा है कि राज्य स्तर पर रेडड् प्लस गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए परिषद् द्वारा विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिषद् ने पहले ही मिजोरम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम राज्यों के लिए राज्य रेडड् प्लस एक्शन प्लान विकसित किया हैय अब परिषद् राज्य रेडड् प्लस एक्शन प्लान की तैयारी के लिए राज्य वन विभागों के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।
श्री अनुराग भारद्वाज, निदेशक (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग), भा.वा.अनु.शि.प. ने जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन में रेडड् प्लस कार्यक्रमों की भूमिका पर प्रकाश डाला और हितधारक परामर्श कार्यशालाओं के उद्देश्यों, संरचना और महत्व को भी बताया। श्री के. मुरुगन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और श्री तपेश कुमार झा, छत्तीसगढ़ राज्य के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रमुख गणमान्य व्यक्ति भी कार्यशाला मे प्रतिभागी है।
छत्तीसगढ़ के राज्य वन विभाग और छत्तीसगढ़ सरकार के अन्य विभागों जैसे कृषि, बागवानी, पशुपालन, ग्रामीण विकास, सामाजिक विकास आदि से प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठन, गैर-सरकारी संगठनों और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के प्रतिनिधि कार्यशाला में भाग ले रहे है। कार्यशालाओं में भा.वा.अनु.शि.प. संस्थानों के वैज्ञानिक का भी क्षमता निर्माण किया जा रहा हैं। श्री वी.आर.एस. रावत, रेडड् प्लस विशेषज्ञ ने अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर रेडड् प्लस के विकास और जलवायु परिवर्तन शमन में वनों की भूमिका के बारे में जानकारी दी है। इंस्टीटयूट ऑफ ग्रीन इकोनॉमी, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. प्रमोद कांत ने वानिकी शमन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए उपलब्ध वित्त के बारे में जानकारी दी है। रेडड् प्लस के विशेषज्ञ डॉ. भास्कर सिंह कार्की और श्री नबीन भट्टराई, अन्तर्राष्ट्रिय एकीकृत, पर्वतीय विकास केन्द्र काठमांडूय और डॉ आर.एस रावत, वैज्ञानिक प्रभारी, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन प्रभाग, भा.वा.अनु.शि.प. क्षमता निर्माण कार्यशाला मे आवश्यक जानकारी प्रदान कर रहे है । पारितंत्र सेवाएं सुधार परियोजना की टीम में श्री एन.पी.एस. नैन, श्री राघवेन्द्र बिसेन, डॉ. मौहम्मद शाहिद, डॉ. गुरवीन अरौरा, डॉ. जयति रावत और श्री सुभाष गोदियाल, रायपुर में हितधारक परामर्श कार्यशालाओं के आयोजन में शामिल हैं।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *