उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में राष्ट्र निर्माण पार्टी का आगाज

देहरादून। उत्तराखंड देवभूमि में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में राष्ट्र निर्माण पार्टी बीजेपी, कांग्रेस व आप जैसी पार्टियों के विरूद्ध एक सशक्त विकल्प के रूप में भाग लेगी। यह घोषणा करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार, जिन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं मध्य प्रदेश एवं गृह विभाग में प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए पश्चिम बंगाल, अरुणाचल, असम एवं दिल्ली में दी हैं, ने बताया कि उत्तराखंड को ही यह गौरव प्राप्त है कि यह आदि शंकराचार्य एवं महर्षि दयानंद जैसे महापुरुषों की तपोस्थली रही है।
डॉ. कुमार ने कहा कि सबकी उन्नति में अपनी उन्नति यह हमारे राजनैतिक दर्शन का आधार है, जबकि अधिकांश राजनेता व पार्टियां अपना या अपनों के विकास में लगे हुए हैं। आप अपने आसपास नजर घुमाकर देख लें, आपको पता लग जाएगा कि किसने कितना विकास किया है। जैसा कि राष्ट्र निर्माण नाम से ही स्पष्ट है कि हम राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हैं और इसलिए राष्ट्र हित के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। ऐसे कोई भी कार्य जिससे राष्ट्र की उन्नति बाधित होती हो, हम नहीं करेंगे। मैं उत्तराखंड वासियों को विश्वास दिलाता हूं कि हमारी पार्टी इस देवभूमि में दैवीय सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना के लिए कार्य करेगी। एक राष्ट्रीय पार्टी है जो मदरसे स्थापित करना चाहती है, जहां कंप्यूटर और कुरान शरीफ पढ़ाई जा सके। दूसरी पार्टी है जिनके नेता कहते हैं उनकी पार्टी मुसलमानों की पार्टी है। एक दिल्ली के नेता हैं जो अवैध बांग्लादेशियों व रोहिंग्याओं को संरक्षण देने में लगी हुई है। ऐसे में उत्तराखंड की जनता तय करे कि वे देवभूमि को क्या बनाना चाहते हैं। वर्तमान में उत्तराखंड में राजनैतिक अस्थिरता बनी हुई है। मुख्यमंत्री लगातार बदले जा रहे हैं। विकास का कार्य ठप है। उत्तराखंड का नौजवान बेरोजगार है। वे पहाड़ों से पलायन कर रहे हैं। इसके लिए बागवानी, औषधीय पौधे तथा जंगल और जल का संरक्षण करके इन पर आधारित उद्योग.धंधे स्थापित कर रोजगार प्रदान किए जाएंगे। शिक्षा, न्याय तथा चिकित्सा हर व्यक्ति का अधिकार है। अतः 12वीं तक की शिक्षाएं अति गंभीर रोगों को छोड़कर अन्य रोगों की चिकित्सा, कंपनी आदि के विवादों को छोड़कर न्याय व्यवस्था राज्य सरकार के व्यय पर उपलब्ध कराई जाएगी। विधायकों तथा सांसदों को दी जाने वाली पेंशन की व्यवस्था समाप्त की जाएगी। संरक्षण प्रकृति मानव केंद्रित विकास यह हमारा विकास का मॉडल है।

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