दो दशक पुराने नासूर का तीन दिन में सफाया

ऋषिकेश। गंगा की सहायक नदी चंद्रभागा के दोनों किनारों पर दो दशक पुराने अतिक्रमण को आखिरकार प्रशासन ने तीन दिन की कार्रवाई में हटा कर ही दम लिया। स्थानीय पार्षद सहित कुछ लोगों ने विरोध किया। प्रशासन ने हल्का बल प्रयोग कर विरोध शांत कराया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की गंगा स्वच्छता निगरानी समिति के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश जीसी ध्यानी ने अगस्त माह में प्रशासन को न्यायिक प्रक्रिया के तहत चंद्रभागा नदी से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। सितंबर माह में एक दिन की कार्रवाई के बाद अभियान रोक दिया गया था। नगर निगम द्वारा चिह्नित 261 अतिक्रमण को हटाने के लिए सोमवार को कार्रवाई शुरू की गई थी। मंगलवार को प्रशासन ने फिर से शेष अतिक्रमण को हटाना शुरू किया। बुधवार को तहसीलदार रेखा आर्य, सहायक नगर आयुक्त एलम दास, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अनुभव नौटियाल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जेसीबी की मदद से माया कुंड क्षेत्र की दिशा में अभियान शुरू किया गया। इस दौरान स्थानीय पार्षद पुष्पा मिश्रा जेसीबी के आगे खड़े होकर विरोध करने लगी। इन लोगों ने प्रशासन पर गृहस्थी का सामान तोड़ने का आरोप लगाया। तहसीलदार ने जब लोगों को समझाया तो वह नहीं माने। जिसके बाद पुलिस की मदद से विरोध कर रहे लोगों को यहां से हटा दिया गया। आधे घंटे बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई फिर से शुरू कर दी गई। प्रशासन ने करीब 100 अवैध रूप से बनाई गई झुग्गी-झोपड़ियां यहां से हटा दी। विरोध कर रहे लोगों का यह आरोप था कि तटबंध के ऊपर हुए पक्के अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं हो रही है। सिर्फ झोपड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है। इस दौरान बुखार से पीड़ि‍त एक बुजुर्ग महिला रुकमा देवी को तहसीलदार ने अपने वाहन से चिकित्सालय पहुंचाया। मौके पर वरिष्ठ उप निरीक्षक मनोज नैनवाल, नगर निगम के सफाई निरीक्षक सचिन रावत, धीरेंद्र सेंमवाल, अवनीश रावत आदि मौजूद रहे। नदी के ऊपर बसे तमाम लोग अपने घर का सामान लेकर तटबंध के ऊपर आकर पसर गए हैं। सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र वाले इस तटबंध पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन अभी कोई रणनीति नहीं बना पाया है। प्रशासन का कहना है कि यहां से हटाए गए लोग अपनी व्यवस्था जब तक नहीं करते हैं उनके लिए यात्रा बस टर्मिनल कंपाउंड के समीप टीन सेट के नीचे रहने की वैकल्पिक व्यवस्था है। गंगा और चंद्रभागा नदी के तट पर हुई यह कार्रवाई करीब 20 वर्ष बाद हो रही है। इससे पूर्व वर्ष 1999 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी युगल किशोर पंत और पुलिस उपाधीक्षक केके गौतम ने एक सप्ताह तक लगातार अभियान चलाकर त्रिवेणी घाट से लेकर चंद्रभागा पुल तक बस्ती बस्ती को साफ कर दिया था। इस दौरान कुछ लोगों ने अपने झुग्गियों में आग लगाकर मानवाधिकार का फायदा उठाने की कोशिश की थी। इसी तरह की कोशिश इस कार्यवाही में भी चल रही थी। मगर प्रशासन की चौकसी से फिलहाल इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है। चंद्रभागा नदी में अवैध झुग्गी-झोपड़ियों को गिराए जाने के बाद बेघर हुए लोगों में प्रशासन ने बुधवार को दाल, भात, रोटी, सब्जी का वितरण किया। तहसीलदार के रेखा आर्य के निर्देशन में लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया। 

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