परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी विदेश यात्रा के लिये हुये रवाना, चलते-चलते पद्मश्री कैलाश खेर के कार्यक्रम में किया सहभाग

  • विदेश यात्रा के पश्चात 22 जनवरी, 2024 को श्रीराम मन्दिर उद्घाटन समारोह में करेंगे सहभाग
  • प्रसिद्ध उद्योगपति श्री भूपेन्द्र मोदी जी, श्री दिलीप मोदी जी और मोदी परिवार की भारत मंडपम, दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थिति

देहरादून, (देवभूमि जनसंवाद न्यूज़) ऋषिकेश, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी अपनी विदेश यात्रा के लिये रवाना हुये। उससे पूर्व भारत मंडपम, दिल्ली में आयोजित सूफी आध्यात्मिक गायक पद्मश्री कैलाश खेर जी के कार्यक्रम में सहभाग किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध उद्योगपति श्री भूपेन्द्र मोदी जी, श्री दिलीप मोदी जी, पूरा मोदी परिवार और कबीर खेर भी उपस्थित थे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी अपनी विदेश यात्रा के पश्चात 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में आयोजित श्री राम उद्घाटन महोत्सव में सीधे सहभाग करेंगे।
चलते-चलते स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि 22 जनवरी, 2024 का दिन इतिहास में दर्ज किया जायेगा। इस दिन भव्य व दिव्य श्री राम मन्दिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। यह दिन भारतीय इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा। वास्तव में यह केवल प्रभु श्री राम की का मन्दिर नहीं बल्कि राष्ट्र मन्दिर है जिसकी प्रतिक्षा 500 वर्षो से हो रही थी।
इस अवसर पर स्वामी जी ने कला धाम अकादमी की शुरूआत करने के लिये पद्म श्री कैलाश खेर जी का अभिनन्दन किया।
आज सावित्री बाई फुले जी की जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि नारियों की शिक्षा में सावित्री बाई फुले का अद्भुत योगदान है। वे एक एजुकेटर और एक्टिविस्ट के साथ सशक्त और सहृदय महिला थी, जो समाज के घोर विरोध के बावजूद स्वयं शिक्षित हुई और दूसरी नारियों को भी शिक्षित करने हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। 18 वीं व 19 वीं सदी में नारियों को शिक्षित करना और अस्पृश्यता आदि सामाजिक मुद्दों पर कार्य करना आसान नहीं था।
स्वामी जी ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से एक समृ़द्ध और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है। फुुले दम्पति ने मिलकर जेंडर इक्वलिटी और सोशल जस्टिस के लिये कई कार्य किये। साथ ही उन्होंने सत्यशोधक समाज नामक एक संस्था शुरू की जिसके माध्यम से वे दहेज प्रथा को समाप्त करना चाहते थे, विधवा विवाह, अस्पृश्यता का अंत, नारी मुक्ति और पिछड़े समुदायों के लोगों, विशेष कर महिलाओं को शिक्षित करना उनके जीवन का उद्देश्य था।
सावित्रीबाई फुले ने अपनी मराठी कविताओं के माध्यम से अस्पृश्यता का अंत, जेंडर इक्वलिटी, मानवता, समानता, एकता, बंधुत्व और शिक्षा के महत्त्व आदि विषयों को उजागर किया। उन्होंने नारी शिक्षा के लिये स्वयं अपनी आवाज को बुलंद किया और पूरा जीवन नारी अधिकारों के लिये संघर्ष किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस समय कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिये अद्भुत पहल की थी। कन्या भू्रण हत्या के लिये न केवल लोगों को जागरूक किया और अभियान चलाया बल्कि नवजात कन्याओं के लालन-पालन के लिये आश्रम भी खोले ताकि उन्हें सुरक्षित जीवन दिया जा सके। आधुनिक नारीवादी एक्टिविस्ट जो स्वंय शिक्षित हुई और दूसरों के जीवन में भी शिक्षा का दीप जलाया ऐसी महान विभूति की समाज सेवा को नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि।

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