निजी बैंकों का किया जाए राष्ट्रीयकरण

उत्तराखंड बैंक इंप्लाइज यूनियन ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण की 56 वीं वर्षगांठ मनाई
देहरादून । उत्तराखंड बैंक इंप्लाइज यूनियन की सभा में पब्लिक सेक्टर बैंक मूवमेंट को गति देने की बात कही गई। शनिवार को यूनियन ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण की 56 वीं वर्षगांठ मनाई। नेशविला रोड स्थित यूनियन कार्यालय में वक्ताओं ने कहा कि बैंकों व वित्तीय संस्थानों का निजीकरण खतरनाक रूप ग्रहण कर रहा है। इसलिए अब निजीकरण को विराम देने के साथ ही दुबारा बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकों का विस्तारीकरण होना चाहिए। निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना चाहिए। कारपोरेट खराब ऋणों की वसूली की जानी चाहिए। पब्लिक सेक्टर बैंकों में नई भर्ती की जाए। आज ही के दिन सन् 1969 को 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। वक्तओं ने बताया कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण से पहले पूरे भारत में केवल 8200 बैंक शाखायें थी जो आज बढ़कर 90000 से ऊपर हो गई है। कुल बैंक कर्मचारियों की संख्या एक लाख थी जो आज बढ़कर आठ लाख हो गई है। राष्ट्रीयकरण से पहले प्राथमिक क्षेत्र को दिया गया ऋण शून्य था जो आज 40 प्रतिशत हो गया है। राष्ट्रीयकरण के बाद गांव के दुरस्त स्थानों में भी बैंकों की शाखायें खुलीं जिससे आम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधा पहुंची। किसानों के जीवन स्तर में भी सुधार हुआ। सभा में सर्वसम्मति से सरकार से निम्नलिखित मांगे की गईं और बैंकों के राष्ट्रीयकरण के स्वरूप को बनाये रखने का संकल्प लिया।
इस मौके पर अनिल जैन, विनय शर्मा, राजन पुंडीर, चंद्रकांत जोशी, बीपी सुंदरियाल, विनोद उनियाल, विजय गुप्ता, आकाश उनियाल, सन्नी कुमार, गोपाल तोमर, महेश गुप्ता, सौरभ शर्मा, आरके गैरोला, बीके ओजा, संजय तोमर, कुलदीप सिंह, राजवीर सिंह आदि मौजूद रहे।

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