- होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (हिका) ने उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की कानूनी कार्रवाई का स्वागत किया; पूरे देश में नियमों का पालन न करने वाली मच्छर अगरबत्तियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की
सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध और नियमों का पालन न करने वाली मच्छर अगरबत्तियों पर शिकंजा कसा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के कृषि विभाग ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में लहरपुर, बिसवां, महोली, सीतापुर और मिश्रिख में छापा मारा। सैंपल लिए गए और दुकानदारों को अनरजिस्टर्ड कीटनाशकों वाली मच्छर अगरबत्तियों को न बेचने के कड़े निर्देश दिए गए। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि ये मच्छर अगरबत्तियाँ, स्वीट नाइट, डायनासोर, कम्फर्ट, श्री डेंगू किलर, ब्लैक डॉट ड्रैगन, सुकून, छू मंतर और परम पॉवर जैसे नामों से बेची जा रही थीं। चिंता इस बात की है कि ये मच्छर अगरबत्तियाँ मेपरफ्लुथ्रिन से बनाई जा रही हैं, जो एक अनरजिस्टर्ड कीटनाशक है।
होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (हिका) ने उत्तर प्रदेश की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। यह एक नॉन-प्रॉफिट औद्योगिक संस्था है, जो भारत में घरेलू कीट नियंत्रण उत्पादों के सुरक्षित व जवाबदेह उपयोग को बढ़ावा देती है। इस संस्था ने इसे अनरजिस्टर्ड कीटनाशकों वाली मच्छर अगरबत्तियों की बिक्री रोकने और नागरिकों की सुरक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
ये मच्छर अगरबत्तियाँ भारत सरकार के सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमिटी की अनुमति के बिना बनाई जा रही हैं। इन चिंताओं की वजह से जिला कृषि अधिकारी ने पेस्टीसाइड सेलर्स, किराना शॉपकीपर्स और पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर्स को अंतिम चेतावनी जारी करके इन अनरजिस्टर्ड कीटनाशकों वाली मच्छर अगरबत्तियों की बिक्री, खरीद और स्टोरेज को तुरंत रोकने का आदेश दिया। यह कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि इन उत्पादों में मेपरफ्लुथ्रिन का इस्तेमाल होता है, जो एक अनरजिस्टर्ड कीटनाशक है। कृषि विभाग ने कहा कि कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 के इस उल्लंघन को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस नई कार्रवाई के साथ उत्तर प्रदेश में अनरजिस्टर्ड कीटनाशकों वाली मच्छर अगरबत्तियों के खिलाफ चल रहे अभियानों में तेजी आएगी। अधिकारियों द्वारा पिछले छः महीनों में राज्य के कई जिलों, जैसे वाराणसी, बलरामपुर, अमरोहा, फिरोजाबाद, चंदौली, बहराईच, प्रयागराज, मैनपुरी, अलीगढ़ और अयोध्या के कई स्थानों पर छापा मारकर कानूनी कार्रवाई की गई है। इससे कानून का पालन न करने वाली और अनरजिस्टर्ड कीटनाशकों वाली मच्छर अगरबत्तियों के खिलाफ जाँच का बढ़ता दायरा प्रदर्शित होता है। राज्य में हुई कानूनी कार्रवाईयों और रिपोर्ट्स में सामने आया कि ये मच्छर अगरबत्तियाँ कम्फर्ट, स्वीट नाईट, डायनासौर स्लीप वेल, डेंगू किलर आदि नामों से बेची जा रही थीं।
इस बारे में जयंत देशपांडे, ऑनरेरी सेक्रेटरी, होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (हिका) ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कार्रवाई में आई तेजी से एक कड़ा संदेश जाता है कि घरों में इस्तेमाल होने वाली मच्छर अगरबत्तियों को नियमों और सुरक्षा मानकों के दायरे में होना जरूरी है। हम सप्लाई चेन में अवैध उत्पादों के खिलाफ कृषि विभाग और जिला प्रशासन द्वारा की जा रही इस कार्रवाई का स्वागत करते हैं। ग्राहकों तक केवल नियमों का पालन करने वाले कीट-नियंत्रण उत्पाद पहुँचे, यह सुनिश्चित करने के लिए ग्राहकों की जागरुकता और लगातार कार्रवाई बहुत जरूरी है।’’
एसोसिएशन ने कहा कि उत्तर प्रदेश अनरजिस्टर्ड कीटनाशकों वाली मच्छर अगरबत्तियों की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए सकारात्मक कदम उठा रहा है। कानूनी जाँच का दायरा केवल निर्माताओं से बढ़ाकर रिटेलर्स, पेस्ट-कंट्रोल ऑपरेटर्स और स्टोरेज पॉईंट्स तक कर दिया गया है।
हिका ने ग्राहकों से आग्रह किया कि वो घरेलू कीट-नियंत्रण उत्पाद केवल वैध माध्यमों से ही खरीदें और उत्पाद खरीदने से पहले पैकेजिंग पर उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, इस्तेमाल के निर्देश और सेंट्रल इंसेक्टिसाइड रजिस्ट्रेशन (सीआईआर) अप्रूवल नंबर जरूर देख लें। साथ ही, यह भी कहा कि रिटेलर वैध उत्पादों का स्टॉक रखकर बेचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जयंत देशपांडे ने कहा, ‘‘परिवारों को मच्छर से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए मच्छरों को भगाना बहुत जरूरी है। लेकिन ग्राहकों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वो अपने घरों में केवल नियमों का पालन करने वाले वैध उत्पादों का ही इस्तेमाल करें। हम आग्रह करते हैं कि ग्राहक इस मामले में सोच समझकर फैसला लें, रिटेलर्स केवल वैध उत्पादों का स्टॉक रखें और अनरजिस्टर्ड कीटनाशकों वाली मच्छर अगरबत्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लगातार चलती रहे।’’

