देहरादून: उत्तराखंड में अगस्त के अंतिम दिनों में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी है और अगले कुछ दिनों में भी इससे राहत मिलने की संभावना कम है। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में कम दबाव के क्षेत्र बनने से बारिश की गतिविधियां आगे भी जारी रह सकती हैं।
मौसम विभाग ने प्रदेश में 2 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। बारिश के साथ कई इलाकों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते भूस्खलन और मलबा आने का खतरा भी बना रहेगा।
आज इन 8 जिलों में Yellow Alert
आज रविवार 30 अगस्त को मौसम विभाग ने उत्तराखंड के आठ जिलों के लिए Yellow Alert जारी किया है। इनमें देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल और बागेश्वर जिले शामिल हैं। वहीं चंपावत, ऊधमसिंह नगर समेत प्रदेश के सभी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर और आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है।
सोमवार को चार जिलों में Orange Alert
सोमवार को मौसम के और अधिक तल्ख रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश का Orange Alert जारी किया है। इन जिलों में आकाशीय बिजली के साथ बारिश के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर आने की आशंका है।
देहरादून में दो घंटे की बारिश से जलभराव
देहरादून में शुक्रवार रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद शनिवार शाम एक बार फिर तेज बारिश हुई। करीब दो घंटे की बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। कई सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई। वहीं बारिश के कारण नदियों का जलस्तर भी बढ़ गया और कई स्थानों पर नदियां उफान पर नजर आईं।
सितंबर के मध्य से शुरू हो सकती है मानसून की विदाई
मौसम विभाग के अनुसार नए मौसमी सिस्टम के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। हालांकि, सितंबर के मध्य से उत्तराखंड में मानसून की विदाई की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू होने की संभावना जताई गई है। फिलहाल प्रदेश में बारिश से जल्द राहत मिलने के आसार कम हैं।
पहाड़ों में बढ़ सकता है भूस्खलन का खतरा
लगातार बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में संवेदनशील सड़क मार्गों पर भूस्खलन, मलबा और बोल्डर गिरने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में पहाड़ों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी जाती है।

