उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जो यह सिखाती है कि इंसान मृत्यु के बाद भी समाज के लिए अमूल्य योगदान दे सकता है। समाजसेवी योगेश अग्रवाल की धर्मपत्नी स्वर्गीय सुमन अग्रवाल ने अपने नेत्रदान के माध्यम से जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी लाने का संकल्प पूरा किया, जिसे जानकर हर कोई उन्हें सच्चे दिल से सलाम कर रहा है।
राजपुर क्षेत्र निवासी योगेश अग्रवाल देवभूमि उत्तरांचल के प्रथम मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी के विशेष कार्याधिकारी (OSD) रह चुके हैं और लंबे समय से समाजसेवा से जुड़े हुए हैं। वे भारत विकास परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी, भारत भारती संस्था के संयोजक, होप सामाजिक संस्था के महासचिव सहित कई सामाजिक संगठनों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। समाजसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे अब तक 131 बार रक्तदान कर चुके हैं।
योगेश अग्रवाल की धर्मपत्नी सुमन अग्रवाल का निधन 2 फरवरी 2026 की सुबह 4 बजे हुआ। सुमन की इच्छा थी कि उनके जाने के बाद उनकी आंखें किसी जरूरतमंद को रोशनी दें। पत्नी की इस अंतिम इच्छा को सम्मान देते हुए योगेश अग्रवाल ने दधीचि देहदान समिति के सहयोग से उनका नेत्रदान कराया। योगेश अग्रवाल स्वयं दृष्टिबाधितार्थ संस्थान देहरादून में कार्यरत रहे हैं, ऐसे में वे और उनकी पत्नी दृष्टिहीनों की पीड़ा और जरूरतों से भली-भांति परिचित थे।
सुमन अग्रवाल के अंतिम संस्कार में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्यमंत्री श्याम अग्रवाल, मुख्यमंत्री के पीआरओ राजेश सेठी, पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, रेडक्रास चेयरमैन डॉ. एम.एस. अंसारी, बार काउंसिल अध्यक्ष राकेश गुप्ता, बार एसोसिएशन देहरादून के अध्यक्ष मनमोहन कण्डवाल, पूर्व पुलिस अधिकारी पुष्पक ज्योति (IPS) सहित सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंचीं।
स्वर्गीय सुमन अग्रवाल का यह कदम समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि नेत्रदान जैसे महादान से मृत्यु के बाद भी किसी का जीवन संवारा जा सकता है। उनकी यह प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों को मानवता और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देती रहेगी।


