उत्तरकाशी: उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में सोमवार को पारंपरिक अढूंड़ी उत्सव (Butter Festival) का आयोजन किया जा रहा है। समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर और 28 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले दयारा बुग्याल में मनाया जाने वाला यह पर्व अपनी अनोखी परंपरा के लिए देशभर में पहचान रखता है। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों के बीच दूध, दही, मक्खन और मट्ठे की होली खेली जाती है।
अढूंड़ी उत्सव की सबसे खास बात यहां खेली जाने वाली अनोखी होली है। इस पर्व में रंगों के बजाय दूध, दही, मक्खन और मट्ठे का इस्तेमाल किया जाता है। मखमली घास और रंग-बिरंगे फूलों से सजे दयारा बुग्याल में स्थानीय ग्रामीण और पर्यटक इस पारंपरिक उत्सव में हिस्सा लेते हैं। अढूंड़ी उत्सव केवल मनोरंजन का पर्व नहीं है, बल्कि इसे प्रकृति के प्रति आभार और सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। दूध, मक्खन और मट्ठे की होली खेलकर ग्रामीण प्रकृति और अपने पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
रैथल गांव से जुड़ी है परंपरा
भटवाड़ी ब्लॉक के रैथल गांव से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर दयारा बुग्याल स्थित है। हर वर्ष रैथल के ग्रामीण भाद्रपद महीने की संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक रूप से अढूंड़ी उत्सव का आयोजन करते हैं। इस बार भी आयोजन में शामिल होने के लिए स्थानीय लोगों के साथ विभिन्न राज्यों और जिलों से पर्यटक रैथल पहुंच चुके हैं। उत्सव से पहले गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने समेश्वर देवता की डोली के साथ ग्रामीणों के जत्थे को दयारा बुग्याल के लिए रवाना किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को पारंपरिक अढूंड़ी पर्व की शुभकामनाएं दीं।
मवेशियों के साथ गर्मियां बिताते हैं ग्रामीण
दयारा बुग्याल में गर्मियों के दौरान स्थानीय ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ समय बिताते हैं। बुग्याल में रहने के दौरान मवेशियों के दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। मानसून के बाद बुग्याल में ठंड बढ़ने लगती है। ऐसे में ग्रामीण धीरे-धीरे अपने मवेशियों के साथ वापस गांव लौटना शुरू कर देते हैं। अढूंड़ी उत्सव को इसी पारंपरिक जीवनशैली से भी जोड़कर देखा जाता है।
हाईकोर्ट की गाइडलाइन का रखा जा रहा ध्यान
आयोजन के दौरान हाईकोर्ट की गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए बुग्याल से करीब 800 मीटर की दूरी पर चिड़ापड़ा और गोई में व्यवस्थाएं की गई हैं। आयोजन स्थल पर पारंपरिक रीति-रिवाज और वेशभूषा के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद दूध, दही और मक्खन की पारंपरिक होली खेली जाएगी।
रैथल में होगी सांस्कृतिक संध्या
अढूंड़ी उत्सव के बाद रैथल गांव में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं और लोक कला की झलक देखने को मिलेगी। बटर फेस्टिवल में हर साल बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी पहुंचते हैं, जिससे यह उत्तरकाशी के प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन आयोजनों में शामिल हो गया है।

