दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र तथा UANP के सहयोग से ध्वनि प्रदूषण पर परिचर्चा आयोजित
देहरादून: दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र तथा उत्तराखण्ड अगेंस्ट नॉइज़ पॉल्यूशन (UANP) के सहयोग से केन्द्र के सभागार में आज सांय ‘ध्वनि प्रदूषण’ विषय पर एक विशेष जन-जागरूकता परिचर्चा आयोजित की गई।
परिचर्चा का उद्देश्य बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के प्रभावों, उससे संबंधित कानूनी प्रावधानों, नागरिकों के अधिकारों तथा शोर की समस्या के समाधान के लिए उपलब्ध व्यावहारिक उपायों के प्रति लोगों को जागरूक करना था।
कार्यक्रम में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि ध्वनि प्रदूषण केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि लगातार और अनियंत्रित शोर का प्रभाव व्यक्ति के दैनिक जीवन, कार्यक्षमता, नींद तथा मानसिक शांति पर पड़ सकता है। इसलिए नागरिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि शोर की समस्या सामने आने पर वे किस प्रकार व्यवस्थित ढंग से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उसके समाधान के लिए संबंधित संस्थाओं तक पहुंच सकते हैं।
कार्यक्रम का संचालन ‘द अननोन इंडिया’ की प्रबंध संपादक सुश्री कीर्ति अहलावत ने किया। उन्होंने स्वागत एवं विषय की भूमिका रखते हुए उपस्थित लोगों से त्वरित संवाद किया और यह समझने का प्रयास किया कि आम नागरिक ध्वनि प्रदूषण की समस्या को किस रूप में देखते हैं तथा शिकायत अथवा समाधान के लिए अब तक क्या कदम उठाते रहे हैं।
UANP के सह-संस्थापक एवं नवप्रवर्तन उद्यमी श्री नितिन अहलावत ने ध्वनि प्रदूषण के विभिन्न प्रभावों और इसे नियंत्रित करने में नागरिक सहभागिता की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समस्या को केवल प्रशासन या पुलिस के स्तर पर छोड़ देने के बजाय नागरिकों को भी अपने आसपास के वातावरण के प्रति जिम्मेदारी के साथ सक्रिय होना होगा।
सामाजिक कार्यकर्ता श्री अनूप नौटियाल ने उत्तराखण्ड अगेंस्ट नॉइज़ पॉल्यूशन की कार्यप्रणाली और इसके उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि UANP का प्रयास लोगों को केवल शिकायत करने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें समस्या की पहचान, प्रमाण जुटाने और उपलब्ध संस्थागत माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए सक्षम बनाना है।
परिचर्चा के महत्वपूर्ण हिस्से में अधिवक्ता प्रणव पुरी ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों और न्यायालयों के विभिन्न निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने नागरिकों को यह समझाया कि कानून में निर्धारित मानकों और प्रावधानों के संदर्भ में शिकायत किस प्रकार की जा सकती है। उन्होंने पुलिस की भूमिका तथा 112 आपात सेवा के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर भी जानकारी दी और यह स्पष्ट किया कि पुलिस तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकार और जिम्मेदारियां क्या हैं।
इसके बाद श्री अनूप नौटियाल और अधिवक्ता प्रणव पुरी ने शिकायत को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तथा साक्ष्य जुटाने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी शिकायत को प्रभावी बनाने के लिए समय, स्थान, शोर के स्रोत और उपलब्ध प्रमाणों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपयोगी हो सकता है।कार्यक्रम में ध्वनि प्रदूषण से जुड़े अपने अनुभव और नागरिक स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को साझा किया गया। इससे परिचर्चा में समस्या का जमीनी पक्ष भी सामने आया।
समापन सत्र में श्री अनूप नौटियाल और श्री नितिन अहलावत ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने आसपास अनावश्यक और अत्यधिक शोर के मामलों को लेकर जागरूक रहें तथा उपलब्ध वैधानिक और संस्थागत माध्यमों का जिम्मेदारी से उपयोग करें। UANP से जुड़ने और सामूहिक प्रयासों में भाग लेने के तरीकों की भी जानकारी दी गई। इसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित लोगों ने ध्वनि प्रदूषण, शिकायत प्रक्रिया, पुलिस की भूमिका और कानूनी उपायों से संबंधित प्रश्न पूछे।
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र का उद्देश्य केवल पुस्तकों और पठन-पाठन तक सीमित नहीं है। वह ज्ञान, शोध, संवाद और सामाजिक जागरूकता का सार्वजनिक मंच विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इसी क्रम में पर्यावरण, समाज, संस्कृति, नागरिक अधिकार और समकालीन सार्वजनिक मुद्दों पर संवाद आयोजित किए जाते हैं, ताकि नागरिकों को तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध हो और विभिन्न पक्षों के बीच सार्थक बातचीत का वातावरण बने।
कार्यक्रम में विजेन्द्र रावत, डॉ.वी के डोभाल, जगदम्बा प्रसाद मैठाणी,दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी तथा पुस्तकालयाध्यक्ष डी.के. पाण्डे, डॉ. अरुण कुकसाल, अजय शर्मा,सुंदर सिंह बिष्ट हिमांशु आहूजा,जगदीश बाबला, आलोक सरीन, हरि ओम पाली सहित पुस्तकालय के सहयोगियों, पाठकों, शोधार्थियों और आम नागरिकों ने सहभागिता की।



