देहरादून: उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विभाग द्वारा 1 जुलाई को जारी स्थानांतरण सूची में ऐसे कर्मचारी का नाम शामिल कर दिया गया, जिनका 28 अप्रैल 2024 को निधन हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि यह पहली बार नहीं हुआ। इससे पहले वर्ष 2025 की स्थानांतरण सूची में भी दिवंगत कर्मचारी का नाम शामिल किया गया था।

तबादला सूची के क्रमांक-37 में कनिष्ठ सहायक सुरेंद्र सिंह का स्थानांतरण निर्माण खंड थराली से प्रांतीय खंड रुद्रपुर दर्शाया गया है। जबकि उनके निधन के बाद उनकी पत्नी को निर्माण खंड गैरसैंण में मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति भी मिल चुकी है। इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए गए।

तीन बार भेजी गई थी लिखित सूचना

जानकारी के अनुसार, संबंधित कार्यालय ने सुरेंद्र सिंह के निधन की सूचना विभागाध्यक्ष कार्यालय को तीन बार लिखित रूप से भेजी थी। इसके अलावा कई बार मौखिक रूप से भी अधिकारियों को अवगत कराया गया था। इसके बावजूद विभागीय अभिलेखों में सुधार नहीं किया गया, जिससे लगातार दूसरे वर्ष भी उनका नाम स्थानांतरण सूची में शामिल हो गया।

उत्तरांचल लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के प्रांतीय महामंत्री आनंद सिंह पुजारी ने इस मामले को विभागीय लापरवाही और उदासीनता का गंभीर उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि कई बार सूचना देने के बावजूद रिकॉर्ड अपडेट न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। साथ ही लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की।

उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

एसोसिएशन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए विभाग को अभिलेखों के रखरखाव की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

त्रुटि को संशोधित कर दिया जाएगा

लोक निर्माण विभाग के एसओडी आर.सी. शर्मा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों का विवरण विभिन्न डिवीजनों से एचआरएम के माध्यम से प्राप्त होता है। यदि किसी कारणवश त्रुटि हुई है तो उसे संशोधित कर दिया जाएगा।

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