ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: पहाड़ पर विकास के नए द्वार खुलेंगे, फ्रीज जोन प्रतिबंधों की समीक्षा

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट के चलते ढाई वर्ष पहले सुरक्षा कारणों से परियोजना क्षेत्र के चार सौ मीटर दायरे को फ्रीज जोन घोषित कर दिया गया था। अब रेल परियोजना अंतिम चरण में है, इसलिए सरकार फ्रीज जोन की समीक्षा करने जा रही है।

सुरक्षा कारणों से लगाए गए निर्माण प्रतिबंध अब चरणबद्ध तरीके से हट सकते हैं। यदि तकनीकी परीक्षण और रेलवे की सहमति मिली तो रेल कारिडोर से जुड़े क्षेत्रों में होटल, होमस्टे, रिसार्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के निर्माण का रास्ता जल्द खुल सकता है। इससे गढ़वाल मंडल के कई क्षेत्रों में निवेश, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

रिपोर्ट में उन क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा, जहां रेलवे ट्रैक, सुरंग व अन्य संरचनाओं का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और जहां सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए विकास गतिविधियों को अनुमति दी जा सकती है।

कब बना था फ्रीज जोन

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है। इसके निर्माण के दौरान सुरंगों, पुलों और रेलवे संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को राज्य सरकार ने 9 जनवरी, 2024 को रेलवे कारिडोर के आसपास के क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था। इसके तहत रेलवे लाइन के दोनों ओर लगभग 400 मीटर तक निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी। यह प्रतिबंध ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर सहित कई क्षेत्रों में लागू किया गया।

उद्यमियों ने प्रतिबंधों की समीक्षा की मांग उठाई

फ्रीज जोन लागू होने के बाद हजारों लोगों की निर्माण योजनाएं प्रभावित हुईं। जमीन खरीद-बिक्री और निवेश की गति भी धीमी पड़ गई। पर्यटन आधारित कारोबार करने वाले स्थानीय उद्यमियों ने भी समय-समय पर सरकार से प्रतिबंधों की समीक्षा की मांग उठाई।

रेल परियोजना से बढ़ेगा आर्थिक महत्व

प्रतिबंध हटने से रेलवे स्टेशन और कारिडोर के आसपास होटल, लाजिस्टिक्स, बाजार और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की छूट रेलवे और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही दी जाएगी। प्रत्येक क्षेत्र का तकनीकी परीक्षण, भूगर्भीय स्थिति, सुरंगों की स्थिरता और रेलवे इंजीनियरों की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। जहां जोखिम होगा, वहां प्रतिबंध जारी रोगा।

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