देहरादून: देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन देहरादून द्वारा एस डब्ल्यू एस एम कार्यालय इंदौर रोड देहरादून में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू किया गया है। संगठन के ठेकेदारों ने जल जीवन मिशन में किए गए कार्यों के भुगतान समय पर न होने की नाराजगी जताते हुए आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। देवभूमि जल शक्ति कॉन्टैक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा” जल जीवन मिशन, उत्तराखण्ड के अन्तर्गत कार्यरत ठेकेदारों के वर्षों से लंबित वैध भुगतानों, सिक्योरिटी एवं रोकी गई धनराशि के तत्काल भुगतान, विभागीय उदासीनता एवं एकतरफा दंडात्मक कार्यवाहियों से उत्पन्न आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न के निवारण तथा लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण हेतु अंतिम चेतावनी के साथ साथ यह हमारा अनिश्चितकालीन हड़ताल है।
अमित अग्रवाल ने कहा अगर हमारी मांगों पर आज शाम तक विचार विमर्श नहीं किया गया एवं हमें मुख्यमंत्री जी एवं सचिव की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला तो हम कल से पूरे प्रदेश के जितने भी ठेकेदार हैं वह जल जीवन मिशन के परियोजनाओं में पानी बंद कर देंगे। वहीं पिथौरागढ़ से आए हुए ठेकेदार ललित कन्याल ने बताया कि अगर हमारी मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया तो मैं भूख हड़ताल पर यहीं बैठ जाऊंगा और मेरे साथ अगर कोई अनहोनी होती है तो वह जिम्मेदारी इस शासन प्रशासन एवं सरकार की होगी।
देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन कि ओर से धरना प्रदर्शन में अध्यक्ष अमित अग्रवाल, उपाध्यक्ष सचिन मित्तल, महा सचिव सुनील गुप्ता, ब्रिज मोहन, गौरव गोयल, अंकित सलार, भरत सिंह पवार, ललित कन्याल, जीता राम सैनी, गोविंद सिंह बिष्ट, राजेन्द्र सिंह, मोहित पवार, रजत सिंघल, जेपी अग्रवाल, केशव सिंह, राजेन्द्र, सुनील जोशी, जगजीत सिंह एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
ठेकेदारों द्वारा दिए गए ज्ञापन:
अत्यंत खेद, रोष एवं गंभीर क्षोभ के साथ आपके संज्ञान में लाना पड़ रहा है कि उत्तराखण्ड राज्य में जल जीवन मिशन के अन्तर्गत “हर घर जल” के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में दिन-रात जुटे ठेकेदार आज अपने ही किए गए कार्यों के वैध एवं देय भुगतान के लिए विगत लंबे समय से शासन एवं विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने को विवश हैं।
जिन ठेकेदारों ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, विषम मौसम एवं सीमित संसाधनों के बीच अपनी पूंजी, बैंक ऋण, संसाधन एवं श्रम लगाकर शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारा, उन्हीं ठेकेदारों को आज अपने भुगतान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता का परिचायक भी है।
लगातार आश्वासनों, बैठकों एवं पत्राचार के बावजूद आज तक ठेकेदारों की समस्याओं का कोई ठोस एवं समयबद्ध समाधान नहीं निकला है। भुगतान न मिलने के कारण ठेकेदार बैंक ऋण के बढ़ते ब्याज, आपूर्तिकर्ताओं की बकाया देनदारियों, मजदूरों के पारिश्रमिक के संकट तथा गंभीर मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। अनेक ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति इस सीमा तक बिगड़ चुकी है कि उनके लिए कार्य जारी रखना कठिन होता जा रहा है।
यदि यही स्थिति बनी रही, तो इसका सीधा प्रभाव प्रदेश की पेयजल योजनाओं के समय पर पूर्ण होने, उनके संचालन एवं रख-रखाव तथा ग्रामीण जनता को मिलने वाले शुद्ध पेयजल पर पड़ेगा, जो स्वयं शासन की प्राथमिकता एवं प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है। अब ठेकेदारों के धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है। मात्र मौखिक आश्वासन अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जब तक सरकार द्वारा लंबित भुगतान नहीं किया जाता, तब तक ठेकेदार अपने लोकतांत्रिक एवं आंदोलनात्मक कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए बाध्य होंगे। अतः देवभूमि जल शक्ति वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तराखण्ड अपने समस्त सदस्य ठेकेदारों की ओर से निम्नलिखित मांगों पर शासन से तत्काल, ठोस एवं लिखित निर्णय की अपेक्षा करती है:
हमारी प्रमुख मांगें
1. समस्त लंबित भुगतानों का तत्काल एवं पूर्ण भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
जल जीवन मिशन के अन्तर्गत ठेकेदारों द्वारा निष्पादित एवं विभाग द्वारा मापित समस्त कार्यों के लंबित देयकों, अंतिम बिलों, रोकी गई धनराशि, सिक्योरिटी डिपॉजिट, टीपीआई एवं टेस्टिंग संबंधी देय धनराशि का भुगतान निश्चित समयसीमा के भीतर तत्काल सुनिश्चित किया जाए। कार्य पूर्ण कर चुके ठेकेदार को उसके वैध भुगतान से वंचित रखना अनुबंध की मूल भावना के विपरीत है। विभागीय अथवा शासन स्तर पर होने वाले वित्तीय एवं प्रशासनिक विलंब का दंड ठेकेदारों पर डालना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।
2. ठेकेदारों के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग, रिकवरी, रिस्क एंड कॉस्ट एवं अन्य दंडात्मक कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
जिन योजनाओं में धनराशि उपलब्ध न होने अथवा विभागीय कारणों से कार्य प्रभावित हुए हैं, उनमें ठेकेदारों के विरुद्ध की जा रही एकतरफा दंडात्मक कार्यवाही तत्काल रोकी जाए।
जब कार्य में विलंब का कारण शासन एवं विभाग की प्रशासनिक कमियाँ हैं, तब उसके लिए ठेकेदारों को उत्तरदायी ठहराना तथा उन्हें ब्लैकलिस्टिंग, रिकवरी एवं रिस्क एंड कॉस्ट की धमकी देना अनुचित, अन्यायपूर्ण एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के सर्वथा विपरीत है।
समस्त प्रभावित योजनाओं की निष्पक्ष समीक्षा कराकर, जहाँ विलंब ठेकेदार के कारण नहीं हुआ है, वहाँ सभी योजनाओं में बिना किसी अर्थदंड के सामूहिक समय विस्तार प्रदान किया जाए।
शासन द्वारा सिक्योरिटी हेतु आई.एस.बी. का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। इसे जल जीवन मिशन के अनुबंधों में भी अविलंब लागू किया जाए, जिससे ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी अनावश्यक रूप से अवरुद्ध न रहे।
3. भुगतान प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जाए।
जल जीवन मिशन के अन्तर्गत भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक औपचारिकताओं, एक ही दस्तावेज को बार-बार मांगने तथा विभिन्न स्तरों पर फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति समाप्त की जाए।
बिल प्रस्तुत होने के पश्चात प्रत्येक स्तर पर निस्तारण की स्पष्ट एवं अधिकतम समयसीमा निर्धारित की जाए तथा अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित उत्तरदायी अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
4. सभी योजनाओं में रोकी गई धनराशि, सिक्योरिटी एवं अन्य वैध कटौतियों का तत्काल निस्तारण किया जाए।
समस्त योजनाओं में निष्पादित एवं मापित कार्यों के विरुद्ध लंबित देयकों, सिक्योरिटी, अन्य रोकी गई धनराशि एवं कटौतियों का तत्काल भुगतान किया जाए।
थर्ड पार्टी द्वारा योजना पूर्ण घोषित होने के पश्चात ठेकेदारों की जिम्मेदारी समाप्त मानी जाए तथा थर्ड पार्टी से संबंधित किसी भी कारण से ठेकेदारों का भुगतान न रोका जाए।
जहाँ सामुदायिक अंशदान अथवा अन्य मदों में धनराशि रोकी गई है, वहाँ संबंधित शासनादेश के अनुसार प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। सामुदायिक अंशदान की वसूली का दायित्व ठेकेदार पर डालकर उसका भुगतान रोकना उचित नहीं है। ठेकेदारों की वैध देय धनराशि को बिना उचित कारण अनिश्चितकाल तक रोककर रखना उनके आर्थिक हितों के साथ गंभीर अन्याय है।
5. ठेकेदारों को रेट्रोफिटिंग, एम.वी.एस. एवं एस.वी.एस. के वर्गीकरण में न उलझाया जाए।
सभी योजनाएँ जल जीवन मिशन के अन्तर्गत ही स्वीकृत एवं निष्पादित की गई हैं। अतः योजना की श्रेणी के आधार पर कोई भेदभाव न करते हुए सभी योजनाओं में एक समान नियम एवं प्रक्रिया से भुगतान किया जाए।
6. समस्त मांगों के निस्तारण हेतु माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एसोसिएशन के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाए।
उपरोक्त सभी मांगों एवं जल जीवन मिशन से संबंधित अन्य लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में पेयजल सचिव, मिशन निदेशक, उत्तराखण्ड पेयजल निगम के वरिष्ठ अधिकारियों तथा ठेकेदार संगठन के प्रतिनिधियों की संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक तत्काल बुलाई जाए। बैठक में प्रत्येक समस्या के समाधान की स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाए तथा लिए गए निर्णयों की लिखित कार्यवाही (कार्यवृत्त) संगठन को उपलब्ध कराई जाए।
अंतिम चेतावनी एवं आंदोलन संबंधी निर्णय
हम अत्यंत विनम्रता, किंतु पूर्ण दृढ़ता के साथ स्पष्ट करना चाहते हैं कि ठेकेदार अब केवल आश्वासनों, पत्राचार एवं बैठकों के भरोसे अपने परिवारों, कर्मचारियों, मजदूरों एवं आपूर्तिकर्ताओं के भविष्य को और अधिक संकट में नहीं डाल सकते। भुगतान में होने वाला प्रत्येक दिन का विलंब अनेक परिवारों की आजीविका पर सीधा आघात है।
शासन एवं विभाग द्वारा ठेकेदारों की न्यायोचित मांगों की निरंतर अनदेखी से संगठन के सदस्यों में व्यापक असंतोष एवं गहरा आक्रोश व्याप्त है, जिसे अब और अधिक समय तक रोक पाना संगठन के लिए भी संभव नहीं रह गया है।
अतः संगठन की स्पष्ट मांग है कि उपरोक्त मांगों पर तत्काल प्रभाव से ठोस निर्णय लेकर लिखित कार्यवाही आदेश जारी किए जाएं तथा लंबित भुगतानों को जारी करने की समयबद्ध कार्ययोजना संगठन को लिखित रूप में उपलब्ध कराई जाए। शीघ्र संतोषजनक कार्यवाही न होने की स्थिति में प्रदेश के जल जीवन मिशन से जुड़े समस्त ठेकेदार पूर्णतः लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन, कार्यबंदी एवं अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होंगे। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन एवं निर्माण कार्यों में आने वाले किसी भी व्यवधान तथा उससे होने वाली जन-असुविधा का संपूर्ण उत्तरदायित्व शासन एवं संबंधित विभागीय प्रशासन का होगा।
हमारा उद्देश्य टकराव नहीं है। हम शासन के साथ मिलकर “हर घर जल” के लक्ष्य को पूर्ण करना चाहते हैं। हमारा संघर्ष केवल अपने संविदात्मक अधिकारों, वैध भुगतान एवं सम्मान की रक्षा के लिए है, किंतु शासन की लगातार उदासीनता ने ठेकेदारों को आंदोलन का मार्ग अपनाने के लिए विवश कर दिया है। अतः आपसे अनुरोध नहीं, बल्कि न्यायोचित एवं गंभीर अपेक्षा है कि उपरोक्त प्रकरणों का सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर तत्काल निस्तारण कर ठेकेदारों को आर्थिक एवं मानसिक उत्पीड़न से राहत प्रदान की जाए। हमें पूर्ण विश्वास है कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय के संवेदनशील नेतृत्व में इस विषय पर शीघ्र एवं न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाएगा।

